कभी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सहयोगी और पं जवाहरलाल नेहरू के पुराने मित्र रहे भारत के पूर्व राजदूत एसीएन नांबियार तत्कालीन सोवियत संघ के जासूस थे। यह दावा किया गया है ब्रिटिश दस्तावेजों में। हालांकि, शुक्रवार को जारी किए इन दस्तावेजों से एक नया विवाद भी पैदा हो गया है।
तीस साल की समयसीमा पूरी होने के बाद जारी किए गए इन दस्तावेजों में बताया गया है कि नांबियार 1924 में बर्लिन में एक पत्रकार के रूप में गए थे और उन्होंने वहां पर भारतीय कम्युनिस्ट ग्रुप के साथ काम किया था। यही नहीं 1929 में उन्होंने सोवियत मेहमान के रूप में मॉस्को की भी यात्रा की थी।
राष्ट्रीय अभिलेखागार में 30 साल के शासन काल के अधीन गैर वर्गीकृत दस्तावेजों के मुताबिक दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ जाने के बाद नांबियार को जर्मनी से निष्कासित कर दिया गया था, हालांकि बाद में बोस के डिप्टी के रूप में उन्हें बर्लिन वापसी की इजाजत दे दी गई।
नेताजी के जापान चले जाने के बाद नांबियार ने जर्मनी द्वारा समर्थित नेता के रूप में भारत के आजादी आंदोलन में भाग लिया। वह भारतीय कैदियों से बने भारतीय लश्कर से भी जुड़े रहे।
जून, 1945 में नांबियार ऑस्ट्रिया में गिरफ्तार भी हुए थे और उनसे नाजियों के सहयोगी के रूप में पूछताछ हुई थी। 1959 में एक भगोड़े से मिली सूचना के मुताबिक, नांबियार ने 1920 के दशक में सोवियत आर्मी के खुफिया एजेंट के रूप में काम किया।
इन दस्तावेजों में नांबियार द्वारा बोस को लिखे वे पत्र भी शामिल हैं, जो जर्मन पनडुब्बी यू-बोट 234 से बरामद किए गए थे। इन खतों को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब्त कर लिया गया था।
संवाददाता भी थे नांबियार
नांबियार ने स्विट्जरलैंड के बर्न में भारतीय दूतावास में काउंसलर, स्कैंडिनेविया और पश्चिमी जर्मनी में भारतीय राजदूत और बाद में हिंदुस्तान टाइम्स के यूरोप के संवाददाता के रूप में भी काम किया था।