क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को होने जा रहे संभावित नुकसान का फायदा भाजपा को मिलेगा? अगर भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजे को सही माने तो यह संभव है।
दरअसल पार्टी के आकलन के मुताबिक राज्य में कांग्रेस की 22 सीटों में से 13 सीटों पर इस बार भाजपा जीत दर्ज कर सकती है।
पार्टी का यह भी आकलन है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उसे बीते चुनाव में सपा की जीती कुल 23 सीटों में से 8 से 9 तो बसपा की 21 सीटों में से 8 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है।
अगड़ी-पिछड़ी जातियों का मिलेगा समर्थन!
आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजे में नरेंद्र मोदी के पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के कारण अगड़ी जातियों के साथ पिछड़ी जातियों में भी पार्टी का आधार बढ़ने की संभावना जताई गई है।
नतीजे के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मतदाताओं में पार्टी उम्मीदवार नहीं बल्कि मोदी ही पहला और सबसे अहम मुद्दा है। हालांकि चुनाव के दौरान संभावित अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण के बारे में इस सर्वेक्षण में कुछ नहीं कहा गया है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक बीते हफ्ते खत्म हुए इस आंतरिक सर्वे में पार्टी की राज्य की 80 में से 52 सीटों पर स्थिति बेहतर बताई गई है। सूत्र का दावा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की बड़ी राजनीतिक ताकत के कारण पार्टी बीते सितंबर महीने से अब तक चार बार आंतरिक सर्वे करा चुकी है।
बिहार में मिलेगी 20 से 25 सीटें
सर्वे में दोनों ही राज्यों में पार्टी की स्थिति लगातार बेहतर होते बताया गया है। मसलन बिहार में हुए अंतिम सर्वे में पार्टी को 20 से 25 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है, तो उत्तर प्रदेश में पार्टी को 52 सीटों पर बेहतर स्थिति में बताया गया है।
पार्टी की चुनाव अभियान समिति से जुड़े एक पदाधिकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कराए गए हालिया सर्वेक्षण में पार्टी को उन सीटों पर ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है, जहां फिलहाल कांग्रेस काबिज है।
इन सीटों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की रायबरेली और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अमेठी सीट शामिल नहीं है।