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कहीं समर्थन तो कहीं आश्वासन पर लौटे एबीवीपी कार्यकर्ता

Sun, 31 Aug 2014 03:11 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला रोहतक
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छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था और छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर एबीवीपी का कॉलेज बंद का मिला जुला असर देखने को मिला।
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शनिवार को जहां कुछ कॉलेजों में कार्यकर्ताओं की मांग को जायज देखते हुए कक्षाएं बंद कर दी गई वहीं कुछ जगह उन्हें पुलिस का भी सामना करना पड़ा। यही नहीं इस दौरान एसएफआई कार्यकर्ताओं के साथ एबीवीपी कार्यकर्ताओं की जमकर बहस हुई।  
 कॉलेज बंद कराने गए कार्यकर्ताओं को नेकीराम कॉलेज में बैरंग लौटना पड़ा। यहां पुलिस ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को कक्षाएं खाली नहीं कराने दी।

जाट कॉलेज में भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं के जाने के बाद कक्षाएं चलती रहीं। हालांकि वैश्य कॉलेज, गौड़, कॉलेज, हिंदू कॉलेज, वीटीआई, वैश्य इंजीनियरिंग कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज सहित कई अन्य कॉलेजों में कक्षाओं को बंद कराया गया।
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विद्यार्थियों ने भी दिया समर्थन
दो छात्राओं के साथ छेड़खानी के बाद आत्महत्या के बाद शैक्षणिक संस्थाओं में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एबीवीपी ने कॉलेजों और यूनिवर्सिटी बंद करने का आह्वान किया था।

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग ग्रुप बना कर वैश्य संस्था के विभिन्न कॉलेजों, हिंदू कॉलेज, गौड़ ब्राह्मण कॉलेज, राजकीय गर्ल्स कॉलेज आदि में जाकर विद्यार्थियों को कक्षाओं का बहिष्कार करने के लिए कहा। कई कॉलेजों में एबीवीपी की मांग को जायज देखते हुए विद्यार्थियों ने कक्षाओं से निकल कर बंद का समर्थन किया।

नेकीराम कॉलेज में हुआ विवाद
एबीवीपी कार्यकर्ता जब नेकीराम कॉलेज पहुंचे तो कॉलेज प्रशासन ने कक्षाएं बंद करने से इनकार कर दिया। कार्यकर्ताओं के साथ कॉलेज स्टाफ की बहस होते देख किसी ने पुलिस को सूचित कर दिया। कॉलेज गेट पर मौजूद पुलिसकर्मी अंदर गए और कार्यकर्ताओं को बाहर जाने के लिए कहा। जब कार्यकर्ताओं ने कॉलेज के विद्यार्थियों से भी चलने के लिए कहा इस पर वहां मौजूद एसएफआई कार्यकर्ताओं ने जाने से इनकार कर दिया। इस पर एबीवीपी और एसएफआई कार्यकर्ताओं के बीच जमकर बहस हुई। बहस बढ़ती देख पुलिसकर्मियों ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को बाहर निकाल दिया।

एबीवीपी का दावा, सफल रहा बंद
कॉलेज बंद कराने केअपने आंदोलन को एबीवीपी ने पूरी तरह से सफल बताया है। एबीवीपी केप्रदेश संगठन मंत्री प्रदीप शेखावत का कहना है कि प्रदेश में यूनिवर्सिटी, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर छात्राओं और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती जा रही है। इसी वजह से रोहतक में दो छात्राओं को आत्महत्या करनी पड़ी। हिसार में एक 9 वीं कक्षा की छात्रा ने छेड़छाड़ से तंग आकर आत्महत्या कर ली, सिरसा और जींद में छात्रा का अपहरण कर लिया गया। प्रदीप ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछले एक महीने में 17 रेप की घटनाएं हुई। इसलिए एबीवीपी की मांग है कि महिला सुरक्षा की प्रक्रिया में सुधार लाया जाए और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाए।
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यह है मांगे :
- यौन शोषण, एसिड अटैक, बलात्कार जैसे सभी प्रकरणों का निराकरण फास्ट कोर्ट में हो।
- महिलाओं के प्रति हिंसा के मामलों पर पहले से बने कानूनों में सुधार हो, नए कानून सख्ती से लागू हो।
- रेप के दोषी को कठोर सजा दी जाए।
 - ऐसे मामलों के निराकरण की समय-सीमा निर्धारित हो, यदि निर्णय समय पर नहीं होता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी पर दंड का प्रावधान हो।
-  पीड़ित महिलाओं के लिए ऐसे सहायता केन्द्र स्थापित किये जाए जो गोपनीयता रखते हुए स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
- छात्राओं केपास सहायता केंद्रों से जुड़ी पूरी जानकारी हो ताकि संकट के समय तुरंत सूचना दे सकें।
- ऐसे केंद्रों केनंबर पर कॉल करने की सुविधा नि:शुल्क हो।
- स्कूलों और कॉलेजों के बाहर पुलिस नियंत्रण कक्ष वाहन की तैनाती सुनिश्चित हो।
- सभी शिक्षण संस्थाओं एवं कार्यस्थलों पर महिला विकास कक्ष की स्थापना हो सहित कई अन्य मांगें रखी।

यह थे मौजूद
कॉलेजों में शिक्षण कार्य बंद कराने में अमनदीप फौगाट, रोहित सुनारिया,नवीन भाली, नवीन गुर्जर, रोहित, आशीष, शिव, विक्रम सहरावत, राहुल सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
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