निचली अदालत की ओर से न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले के दूसरे दिन भी आसाराम बापू को राहत नहीं मिली।
वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी की पैरवी के बावजूद आसाराम की तमाम दलीलें एक-एक कर जज के सामने ढहती चली गईं।
साथ ही, बहस के दौरान पीड़िता के वकील ने आसाराम को कम उम्र की महिलाओं के प्रति आकर्षित होने वाली बीमारी पेडोफाइल से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। आसाराम की जमानत अर्जी पर सुनवाई करीब डेढ़ घंटे चली।
जोधपुर हाईकोर्ट का कहना है कि फिलहाल मामले के इस चरण को देखते हुए जमानत अर्जी स्वीकृत नहीं की जा सकती।
अदालत में पिछली सुनवाई के वक्त आसाराम ने कहा था कि पीड़िता को पुरुषों के प्रति आकर्षित होने वाली बीमारी है। साथ ही वह बालिग भी है।
जज के सामने आसाराम के वकील राम जेठमलानी ने समय मांगा था, लेकिन वे आज भी कोई भी पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।
पिछली सुनवाई में भी जेठमलानी ने पीडि़ता के चरित्र पर व एफआईआर के तथ्यों पर अंगुली उठाई थी और इस बार भी ऐसा करने पर न्यायाधीश ने उन्हें रोकते हुए कहा कि पुरानी बात ही करते रहेंगे या मामले में कुछ नए दस्तावेज पेश करेंगे।
इसके बाद आसाराम को मामले में फंसाने की बात कहते हुए जेठमलानी ने तीन-चार शपथ पत्र पेश किए, जो पीडि़ता के गुरुकुल में नहीं रहना चाहने, उसके प्रेम प्रसंग होने व मानसिक रोगी होने से संबंधित थे।