फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिल्म की कहानी की तरह है आरुषि हत्याकांड

Wed, 26 Sep 2012 08:23 AM IST
नोएडा/विजय जैन
विज्ञापन
विज्ञापन
नोएडा के चर्चित आरुषि और हेमराज हत्याकांड का मामला अपराध और जासूसी फिल्म की कहानी की तरह है। दर्शक कुछ समझ पाएं इससे पहले ही कहानी में एक नया मोड़ आ जाता है। आरुषि मामले का अपराधी चतुर है। तहकीकात करने वालो को गुमराह करने में माहिर है। बिल्कुल फिल्मों की तरह वर्दीवाले गुमनाम अपराधी से मिले हुए हैं। यकीनन तभी जांच के लिए भेजे गए आरुषि के स्वैब के नमूने बदल दिए जाते हैं। दरअसल कोई चाहता ही नहीं कि इस कहानी का पटाक्षेप हो।
विज्ञापन


शायद इसलिए आरुषि के शव के डीएनए सेंपल लेने से पहले ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। एक आम पाठक को भी समझ आता है कि आरुषि हत्याकांड को सुलझाने का ड्रामा चल रहा है। पुलिस और सीबीआई शक की बुनियाद पर कभी आरुषि के पिता राजेश तलवार को पकड़ लेती है तो कभी उनके कम्पाउडर कृष्णा और नौकर को दबोच लेती है। गहन पूछताछ होती है। आधुनिक अपराधों को आधुनिक तरीकों से सुलझाने के लिए आधुनिक तकनीके अपनाएं जाती हैं। नार्को टेस्ट, ब्रेन मैंपिग और लाई डिटेक्टर परीक्षण करवाएं जाते है। फिल्म की पटकक्षा में रहस्य बरकरार है।

आरुषि हत्याकांड के मामले मे खबरों की दुनिया में बिकने के लिए सारे तथ्य मौजूद हैं- मसलन मर्डर-बलात्कार, सबूतों के साथ छेड़छाड़, रहस्य, गुमनाम अपराधी और अंधेरे में जाने अनजाने तीर छोड़ती पुलिस-सीबीआई। मौत से पहले आरुषि बदनाम न थी। वे सिर्फ गुमनाम थी। उसकी मौत की गुत्थी सुलझाने वालों ने आरुषि मामले का छिछालेदर किया है।
विज्ञापन


शायद एक दिन आरुषि बोल उठे कि ´उसकी हत्या को अनसुलझा ही छोड़ फाइल को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दो´। इस देश में ऐसी और भी मामले और कहानियां होंगी जो आज तक अनसुलझी ही रहीं हैं। दर्शकों के लिए अपराधिक फिल्म का अंत वैसा नहीं होता जैसा उन्होंने सोचा था। आरुषि-हेमराज हत्याकांड के साथ भी शायद ऐसा ही हो।

CBI ने तलाशे हैं बेजुबान गवाह!
1. आरुषि हत्याकांड में सबूत तलाशने के लिए सीबीआई ने तलाशे हैं कुछ बेजुबान चश्मदीद गवाह। सीबीआई का पहला बेजुबान गवाह डाइनिंग टेबल। आरुषि तलवार की कत्ल की रात नोएडा के जलवायु विहार के फ्लैट नंबर एल -32 में मौजूद डाइनिंग टेबल आरुषि हत्याकांड का सबसे बड़ा गवाह है। हत्या के बाद जब पुलिस वहां पहुंची थी तो उसे इस टेबल पर शराब की आधी भरी हुई बोतल और तीन खाली गिलास मिले थे। क्या इस गवाह ने कोई गवाही दी है? सच ये है कि बोतल और ग्लास फ्लैट में डाइनिंग टेबल पर बड़े करीने से रखे हुए मिले थे।

2. आरुषि और हेमराज की हत्या का दूसरा गूंगा गवाह फ्लैट के बंद दरवाजे हैं। आरुषि के कमरे में घुसने के लिए 4-4 फीट की दूरी पर मौजूद घर के तीन दरवाजों को पार करना होता। उस रात सभी दरवाजों को लॉक किया गया था, कातिल ने दरवाजों के लॉक तोड़े नहीं। तो क्या कातिल को ताला खोलकर अंदर घुसाया गया? या कातिल घर के भीतर ही था?

3. आरुषि और हेमराज की हत्या का तीसरा गूंगा गवाह है राजेश तलवार के चचेरे भाई दिनेश और उसके लड़के के बीच की बातचीत। ये बातचीत कुछ इस तरह थी... लड़का-पापा राजेश अंकल के साथ कुछ हो ना जाए...
दिनेश-क्या हो जाएगा, क्या हो जाएगा?
लड़का-मुझे आभास हो रहा है कि कोई अनहोनी होने वाली है...
दिनेश-कुछ नहीं होगा कोई भी तो नहीं है सिर्फ एक ही तो था...

4. सीबीआई का चौथा बेजुबान गवाह है आरुषि के शव पर डाली गई चादर। जांच के मुताबिक आरुषि के शव पर ये चादर उसके मां बाप ने नहीं डाली थी। यहां सीबीआई को इस चादर में एक गवाह भी नजर आया। सीबीआई का तर्क है कि कत्ल के बाद आरुषि के शव को कातिल ने चादर से ढंका। कातिल का कत्ल के बाद शव को ढंकना हैरान करने वाला है साफ है कि उसके मन में कहीं ना कहीं आरुषि के लिए सहानुभूति थी।

अब तक 'जीरो'
यूपी पुलिस से होते हुए सीबीआई तक पहुंची इस पेचीदा मर्डर मिस्ट्री की जांच ने कई अहम मुकाम देखे। शक की सुई बेलगाम घूमती रही। सीबीआई के शक की सूई पहले नौकरों कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल की तरफ घूमी। कृष्णा और राजकुमार को जेल की हवा भी खानी पड़ी, लेकिन सबूतों के अभाव में गाजियाबाद की अदालत ने दोनों को जमानत दे दी। साथ में अदालत ने सीबीआई की खोखली जांच की हवा भी निकाल दी। साफ था कि सीबीआई हारी हुई लड़ाई लड़ रही थी।

आरुषि-हेमराज कांड में अब तक:
- 16 मई 08: आरुषि की हत्या, लाश बेडरूम में मिली
- 17 मई 08: नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली, उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप राजेश तलवार ने लगाया था
- 18 मई: जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया
- 23 मई: पुलिस ने डा. राजेश तलवार को हत्याकांड के आरोप में गिरफ्तार किया
- 29 मई: जांच सीबीआई के हवाले
- 03 जून: कंपाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया
- 27 जून: नौकर राजकुमार को गिरफ्तार किया गया
- 11 जुलाई: नौकर विजय मंडल गिरफ्तार, डा. तलवार को जमानत मिली
- 29 दिसंबर 2010: सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई, कोर्ट ने नहीं लिया संज्ञान
- 09 फरवरी 2011: मामले में तलवार दंपति बने आरोपी
- फरवरी 2011 में क्लोजर रिपोर्ट के चलते कोर्ट ने नूपुर को किया तलब।
- 30 अप्रैल 2012: जेएम सीबीआई कोर्ट में नूपुर का सरेंडर, कोर्ट ने जेल भेजा। अंतरिम जमानत अर्जी खारिज।
- 9 मई: दस्तावेजों को लेकर सीबीआई और बचाव पक्ष के बीच हुई 15 मिनट बहस, जेएम सीबीआई ने सुनाया सेशन कमिट का फैसला।
- 9/10 मई: जेल में एक ही रात में नूपुर ने अपनी कथित किताब ‘मिस्ट्री बिहाइंड आरुषि: ए स्टोरी बाय एन अनफोरच्यूनेट मदर’ के 17 पेज लिख डाले।
- 24 मई: सीबीआई विशेष कोर्ट ने तलवार दंपति पर आईपीसी की धारा-302, 201 और सपठित धारा-34 और राजेश तलवार पर धारा-203 के तहत भी आरोप तय करने के आदेश दिया।
विज्ञापन

- 25 मई: तलवार दंपति पर आरोप हुए तय।
- 17 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर तक नूपुर को जमानत दिए जाने का आदेश दिया।
- 25 सितंबर: सीबीआई स्पेशल जज एस. लाल ने नूपुर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। डासना जेल से नूपुर हुई रिहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें