चर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में शुक्रवार को दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेश कुमार सिंघला ने अपने बयान दर्ज कराए।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में उन्होंने बताया कि 1 और 2 जून 2008 को वह सीएफएसएल टीम के साथ घटनास्थल पर गए थे और उसका निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि आरुषि के कमरे के दरवाजे पर बाहर की ओर खून के निशान थे। कमरे के अंदर दांयी तरफ दीवार पर भी खून के धब्बे थे।
इससे निष्कर्ष यह निकाला गया कि वारदात के समय आरुषि के कमरे का दरवाजा अंदर की ओर खुला हुआ था।
इसके अलावा छत की दीवार पर खून लगे पंजे का निशान था। पूरे पंजे में खून लगा था।
उन्होंने यह भी बताया कि 17 जून 2008 को उन्होंने पिलो कवर और एक धागे के टुकडे़ जिसे खुखरी में कवर बताया गया था, की जांच भी की थी।
इस पर मानव रक्त मिला, मगर ब्लड ग्रुप नहीं मिला। गवाह से डिफेंस की ओर से अब 20 नवंबर को जिरह की जाएगी। इससे पूर्व कड़ी सुरक्षा के बीच दोहरे हत्याकांड के आरोपी तलवार दंपति कोर्ट में पेश हुए।