दिल्ली की कुर्सी संभालने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने शनिवार को सचिवालय के बाहर पहली बार जनता दरबार लगाया, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। कुछ देर बाद ही इसे स्थगित करना पड़ा।
इस दरबार में इतनी ज्यादा भीड़ पहुंच गई कि प्रशासन के सारे इंतजामात धरे के धरे रह गए। भीड़ बेकाबू हो गई और सुरक्षा घेरा, बैरिकेड तोड़ दिए। ऐसी अफरा-तफरी मची कि शिकायत करने पहुंचे लोगों के दस्तावेज सड़क पर बिखरे पड़े थे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट के दूसरे मंत्री मौजूद थे, लेकिन वहां मौजूद लोग कुछ सुनने-समझने को तैयार नहीं थे। बहुत से लोग ऐसे थे, जो किसी शिकायत के साथ नहीं आए थे। वे सिर्फ केजरीवाल को बधाई देना चाहते थे।
बीच में जाना पड़ा केजरीवाल को
बेकाबू भीड़ की वजह से इतनी अव्यवस्था थी कि लोगों के जरूरी दस्तावेज तक गायब हो गए। हालात काबू न आते देख दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केवल 15 मिनट वहां रुकने के बाद रवाना हो गए।
दिल्ली सचिवालय के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी चीजों को संभालने की काफी कोशिश करते दिखे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
अरविंद केजरीवाल के वहां से जाने के बाद कुछ लोग धरना देकर बैठ गए। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्या का हल नहीं मिलेगा, वे वहां से नहीं जाएंगे।
दूसरे शहरों से भी आए लोग
दिल्ली सचिवालय के बाहर जुटी भीड़ केवल दिल्लीवासियों की नहीं थी। पड़ोसी राज्यों से भी लोग अपनी समस्याएं लेकर आए थे। उनका कहना था कि अरविंद केजरीवाल उनकी दिक्कतें भी दूर कर सकते हैं।
केजरीवाल ने ऐलान किया था कि हर शनिवार मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट सचिवालय के बाहर लगने वाले जनता दरबार में लोगों की दिक्कतें सुनेंगे और समाधान देने की कोशिश करेंगे।
लेकिन मुख्यमंत्री या उनकी टीम को इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि ऐलान करने के बाद शनिवार सवेरे सचिवालय के बाहर ऐसा हुजूम लग जाएगा। यही वजह है कि पहले से किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हुए।
भीड़ को मनाने फिर बाहर आए अरविंद
सचिवालय के बाहर हालात बिगड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल वहां से चले गए थे। कुछ देर बाद वह फिर आए और सचिवालय की दीवार के दूसरी तरफ से बाहर सड़क पर खड़े लोगों को आश्वासन दिया कि वे संयम बरतें, तो सभी की मुश्किल सुनी जाएगी।
उस वक्त सड़क पर खड़े लोगों ने केजरीवाल को अपनी शिकायतें और दूसरे दस्तावेज थमाने शुरू कर दिए। उनके साथ मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे।
इसके बाद केजरीवाल और उनकी टीम सचिवालय की छत पर चली गई। केजरीवाल ने वहां से कहा कि ठेके पर काम करने वाले लोगों की समस्याओं पर गौर किया जाएगा। उन्होंने भीड़ से कहा कि जल्द ही दूसरा जनता दरबार लगाया जाएगा।
खामियों पर केजरीवाल ने दी सफाई
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें इतनी ज्यादा भीड़ का अंदाजा नहीं था। भीड़ बेकाबू हो गई। उन्होंने कहा, "आज हमारा पहला दिन था। जहां मैं बैठा था, वहां शिकायतें लेने के बाद भी लोग नहीं हट रहे थे। इंतजाम में कमी रह गई।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे निकलना पड़ा, क्योंकि लोग मेरी टेबल पर भी चढ़े थे। भीड़ थी, जो बात नहीं सुन रही थी। हमें दूसरे तरह से इंतजाम करना पड़ेगा। लोगों को कतार में खड़ा होकर शिकायतें बतानी होंगी। वरना धक्का-मुक्की में गड़बड़ हो सकती है।"
उन्होंने कहा, "जनता दरबार की जगह भी बदली जा सकती है। केजरीवाल ने कहा कि बहुत से ऐसे लोग थे, जो बधाई देने आए थे। हाथ मिलाने आए थे।"
'वहां से न जाता, तो हो सकता था हादसा'
केजरीवाल ने कहा, "अगर मैं वहां से नहीं निकलता, तो भगदड़ मच सकती थी। मंत्री अपनी-अपनी टेबल पर बैठे थे। लेकिन लोगों की भीड़ मेरी तरफ ज्यादा थी। मैं सहमत हूं कि सभी लोग मुझसे मिलना चाहते थे। मैं घबराया गया। या तो लोकेशन बदलनी पड़ेगी या तरीका बदलना होगा।"
दिल्ली के सीएम ने कहा, "अफसरों के साथ बैठकर इस पर चर्चा होगी। सोमवार-मंगलवार को जनता दरबार नहीं लगेगा। दो-तीन दिन रुकना होगा और इंतजाम में सुधार की जरूरत है। लोगों की उम्मीदें बहुत हैं। मैंने भी गौर किया कि सरकारी कर्मचारी काफी निराश हैं। किसी की पेंशन नहीं मिली, किसी को स्थायी नहीं किया गया। सरकारी कर्मचारी, सरकार से ज्यादा नाराज हैं।"
केजरीवाल के मुताबिक 70 फीसदी से ज्यादा दिक्कतें सरकारी कर्मचारियों की थी। दूसरे नंबर पर पानी की समस्या। तीसरी दिक्कत बिजली के बिलों की है। लोगों का कहना है कि बिल गलत भेज दिया, फिर कनेक्शन काट दिया।
भाजपा-कांग्रेस ने बोला AAP पर हमला
भाजपा के नेता विजय गोयल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने महंगाई ओर भ्रष्टाचार का मुद्दा छोड़ दिया है। दिल्ली की नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक भी शब्द नहीं बोला। उन्होंने कहा, "शीला दीक्षित और उनके सहयोगियों के खिलाफ जो कार्रवाई करनी चाहिए थी, वह नहीं हुई। सत्ता में रहने के लिए करप्शन से समझौता कर लिया गया है।"
गोयल ने कहा, "महंगाई बढ़ रही है। सीएनजी-पीएनजी महंगी, बिजली की 50 फीसदी सब्सिडी नहीं दी गई। जितनी दी गई, 400 वॉट तक दी गई। सब्सिडी की बात ही नहीं थी, केजरीवाल ने कहा था कि कम करके दिखाएंगे। केवल 10 फीसदी जनता को 666 लीटर पानी मिलेगा। बाकी दिल्ली को पानी मयस्सर नहीं है।"
कांग्रेसी नेता शकील अहमद ने कहा, "अभी तो शुरुआत है। इब्तदा ए इश्क में रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या! यह ट्रायल एंड ऐरर आधार पर चल रहा है।" एक वक्त केजरीवाल की साथी रहीं किरण बेदी ने ट्वीट पर कहा, "टीम केजरीवाल को यह समझना होगा कि सचिवालय हवा में नहीं चलता। मुद्दों को पहचानिए और तब फैसला कीजिए।"