लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-बीजेपी को पटखनी देने के लिए कमर कस चुकी आम आदमी पार्टी अपने ही नेताओं के बगावती तेवर से परेशान है।
'आप' के लीगल सेल के संयोजक अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया है कि पार्टी के 64-70 लोकसभा उम्मीदवार के नाम पहले से ही तय थे। तो फिर हजारों लोगों का इंटरव्यू लेने का क्या मतलब?
उपाध्याय ने कहा, 'लोकसभा की 70 सीटों के लिए 10 हजार से ज्यादा लोगों के इंटरव्यू लिए गए थे। लेकिन आशुतोष (चांदनी चौक), जरनैल सिंह (पश्चिमी दिल्ली), राजमोहन गांधी (पूर्वी दिल्ली), योगेंद्र यादव (गुड़गांव), खालिद परवेज (मुरादाबाद) और अंजलि दमनिया (नागपुर) समेत कई प्रत्याशी के नाम पहले से ही तय थे।'
चंदे पर भी सवाल
उपाध्याय ने कहा कि आम आदमी पार्टी फोर्ड फाउंडेशन से मिले चंदे से जनता का मनोरंजन कर रही है। भला यह फाउंडेशन की एक आदमी और इस राजनीतिक दल पर इतनी मेहरबानी क्यों?
उन्होंने कहा कि जातिवाद, सांप्रदायिकता, परिवारवाद और भ्रष्टाचार से परे रहकर इस पार्टी का गठन हुआ था। सच्चाई तो यह है कि पार्टी इन मूल्यों से काफी दूर चली गई है। अब तो यहां करप्शन को लेकर कोई चर्चा ही नहीं होती है।
केजरीवाल पर दागा सियासी गोला
उपाध्याय ने अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे देने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जनता की रायशुमारी के बाद केजरीवाल ने दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला किया था, तो फिर इस्तीफा देते वक्त उन्होंने जनता से राय क्यों नहीं ली?
हालांकि उपाध्याय ने साफ किया है कि वे पार्टी छोड़कर नहीं जा रहे हैं। पार्टी यदि चाहे तो वह उन्हें निकाल सकती है।