बीते कुछ दिनों से आलोचना का सामना कर रही दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने लोगों को एक बार फिर अपनी तरफ खींचने के लिए बड़ा दांव खेला है। और यह दांव लगाया गया है नौकरियों पर।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि दिल्ली सरकार में कॉन्ट्रैक्ट की सभी नौकरियों को स्थाई किया जाएगा। केजरीवाल ने इस सिलसिले में नीतियां और गाइडलाइंस बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कहा कि जब तक नए पैमाने के आधार पर भर्तियों की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक काम कर रहे अस्थाई कर्मचारियों को हटाने पर रोक लगेगी।
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सरकार ने किया समिति का गठन
इस बारे में गाइडलाइंस तैयार करने का जिम्मा 13 सदस्यों वाली उच्चस्तरीय समिति को सौंपा गया है, जिसकी अगुवाई प्रमुख सचिव एस के श्रीवास्तव करेंगे। इस समिति में दो रिटायर्ड आईएएस अफसर प्रकाश चंद्र और प्रफुल्ल करकेटा होंगे।
इसके अलावा कमेटी में वित्त, विधि और शहरी विकास विभाग के सचिवों को भी जगह दी जाएगी। समिति को एक महीने के भीतर इस सिलसिले में पॉलिसी बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।
आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है, "समिति पॉलिसी बनाने और भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देते वक्त सभी कानूनी, तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर गौर करेगी। इन पदों को स्थाई बनाने के लिए भी समिति की ओर से वक्त तय किया जाएगा।"
तब तक नहीं हटेंगे अस्थाई कर्मचारी
दिल्ली के शिक्षा और शहरी विकास मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, "जब तक नई पॉलिसी के आधार पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा।"
फिलहाल दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभागों में एक लाख से ज्यादा कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। जहां तक भर्ती प्रक्रिया का सवाल है, उम्र के मोर्चे पर राहत देने और कर्मचारियों की कुशलता के अलावा अनुभव पर भी फोकस किया जाएगा।
सिसोदिया का कहना है कि फिलहाल उनकी सरकार कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों का ब्योरा जुटा रही है। उनका कहना है कि 2008 में खाली पड़े पदों की तादाद 18500 थी, जो पिछले साल दिसंबर में बढ़कर 36000 पर पहुंच गई और इसके लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है।
'शीला सरकार ने बेड़ा गर्क कर दिया'
मनीष सिसोदिया ने कहा कि शीला दीक्षित सरकार की प्राथमिकताओं में खाली पड़े पदों को भरना कभी शामिल नहीं था। उन्होंने कहा, "दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (डीएसएसबी) के डाटा पर निगाह डालने पर हमें पता चला कि पांच साल पहले 18500 पद खाली थे, जो अब 36000 हो गए हैं।"
विभाग के प्रमुखों की तरफ से ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों के लिए लगातार डिमांड की जा रही थी। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की जगह से सरकार के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है और यह लोगों के भविष्य से खिलवाड़ की तरह भी है।
आम आदमी पार्टी पिछले कई दिनों से दिक्कतों से जूझ रही है, क्योंकि उसके कानून मंत्री सोमनाथ भारती फंसते दिख रहे हैं। ऐसे में यह कोशिश एक बार फिर उसे लेकर सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकती है।
मनीष सिसोदिया का कहना है कि हाल में उन्होंने डीएसएसबी की एक बैठक की थी और यह पूछा था कि भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने में कितना वक्त लग सकता है। सिसोदिया ने कहा, "मुझे जवाब मिला है कि अगर वह अपनी तरफ से पूरी जान फूंक दे, तो इसमें 165 महीने लग जाएंगे।"
सिसोदिया ने आश्वासन दिया कि भर्ती की इस प्रक्रिया को फास्ट ट्रैक पर रखना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है और इस तरफ गंभीर रुख दिखाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हमने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सभी अस्थाई पदों को स्थाई बनाया जाएगा। यह इस दिशा में एक बड़ा कदम है।" देखना दिलचस्प होगा कि इसमें कितना वक्त लगता है।