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हंगामे के बीच 'आप' ने हासिल किया विश्वासमत

Thu, 02 Jan 2014 10:48 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर चौधरी मतीन अहमद के ऐलान के साथ ही केजरीवाल ने विश्वासमत हासिल कर लिया। चौधरी मतीन अहमद ने सदन में सदस्यों को खड़ा कर पूछा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में कौन है और विरोध में कौन है?
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इस दौरान आप को कांग्रेस के आठ विधायकों के अलावा जेडीयू के एक विधायक का समर्थन मिला। इसी समर्थन के सहारे आप ने सदन में विश्वास मत हासिल कर लिया।

विश्वासमत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये सच्चाई और ईमानदारी के जीत है।

केजरीवाल ने सदन के सामने रखे तीन सवाल

वोटिंग से पहले सदन में अपनी बात रखते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैं तीन सवाल रखना चाहता हूं। आम आदमी की लड़ाई में सदन का कौन-कौन सदस्य साथ है? सदन के सामने सवाल है कि देश में सच्ची और ईमानदार राजनीति में कौन-कौन साथ है?‍

कौन-कौन सदस्य है जो हमारे जरिए उठाए गए मुद्दों पर साथ हैं? मैं सदन से इस विश्वास मत को पास कराने का आग्रह करता हूं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की अनधिकृ‌त कॉलोनियों को सहूलियत मिले। कारोबारी ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, लेकिन उनके साथ भी सही व्यवहार नहीं होता।

रीटेल में एफडीआई का विरोध हम भी करते हैं, भाजपा भी करती है। मुझे तो नहीं लगता कि इसमें कोई दिक्कत होनी चाहिए।

दिल्ली में वीआईपी कल्चर हो खत्म

केजरीवाल ने कहा कि वीआईपी कल्चर खत्म करना जरूरी है। जब कोई नेता निकलता है, तो ट्रैफिक रुक जाता है। कहते हैं कि उनका वक्‍त बर्बाद होता है। मैं तीन-चार दिन से रोज निकल रहा हूं और ट्रैफिक में फंसता भी हूं, लेकिन मेरा कोई वक्‍त खराब नहीं हुआ।

केजरीवाल ने वीआईपी कल्चर पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि दिल्ली में वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहिए। इसके साथ ही केजरीवाल ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत में सुधार जरूरी है।

निजी स्कूलों ने जो अंधेर मचा रखा है, उसे रोकना होगा। सरकारी अस्पतालों का हाल बुरा है। महिला सुरक्षा के लिए अलग दल बनाने की जरूरत है।

हम सुधारेंगे राजनीति

केजरीवाल ने कहा कि हमें सोचना होगा कि हम जैसे आम लोगों को चुनाव लड़ने की जरूरत क्यों पड़ी? आज तमाम चीजें खराब हैं, क्योंकि राजनीति खराब है। हम सभी को मिलकर इस राजनीति को सुधारना होगा।

देश के नेताओं को लगा कि आम आदमी चुनाव नहीं लड़ सकता। हमारे सामने यह क्या खड़ा होगा? लेकिन नेता यह भूल गए कि देश के खेतों में आम आदमी काम करता है, नेता नहीं करते।

मशीनें, ऑटो आम आदमी चलाता है। रिसर्च वही करता है। चांद पर वही जाता है। इनमें से कोई भी काम नेता नहीं करते। दिल्ली के नए सीएम ने कहा कि आम आदमी ने ठान लिया क‌ि चुनाव लड़ेंगे। लेकिन न बल था, न पैसा था। यह असंभव सी लड़ाई है।

किसने सोचा थ‌ा कि साल भर पुरानी पार्टी 28 सीटें जीत जाएगी। नेता मजाक उड़ाते थे। लेकिन ईश्वर साथ था। 4 और 8 दिसंबर को चमत्कार हुआ। पहले भगवान पर यकीन नहीं था, लेकिन अब यकीन हो गया।‌

दिल्ली की आम जनता ने भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए पहला कदम उठाने की जुर्रत की। अब देखना यह है कि इस सदन का कौन-कौन आदमी इस कोशिश में साथ है?

विश्वासमत के दौरान मचा खूब हंगामा

विधानसभा में जेडीयू विधायक शोएब इकबाल के बयान पर हंगामा। गुस्से में इकबाल ने अपना कोट उतार दिया। ऐसा बताया जा रहा है कि वह बोलने के लिए कम वक्त दिए जाने से खफा थे।

उन्हें बोलने के लिए 2 मिनट का वक्त दिया गया था। शोएब इकबाल और भाजपा विधायकों के बीच तू तू-मैं मैं हुई। इसपर प्रोटेम स्पीकर चौधरी मतीन अहमद ने इकबाल को चेतावनी भी दी।

इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा था कि उन्हें नैतिक जनादेश मिला है और वे जनता के विकास के लिए सदन का समर्थन चाहते हैं।

भाजपा नेता डॉ. हर्षवर्धन का कहना था कि केजरीवाल ने कांग्रेस का समर्थन लेकर जनता को धोखा दिया है।

कांग्रेस का पक्ष रखते हुए अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि वह जनता के आदेश को समर्थन दे रहे हैं और जब तक AAP सरकार जनता की भलाई के लिए काम करेगी, कांग्रेस का समर्थन जारी रहेगा, यह अवधि 5 साल भी हो सकती है।
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लवली ने लगाए आरोप, गुमराह कर रहे हैं केजरीवाल

अरविंदर सिंह लवली ने सदन में आरोप लगाते हुए कहा क‌ि अधिकारी आम आदमी पार्टी और उनके नेता केजरीवाल को गुमराह कर रहे हैं। पहले कहा जा रहा था कि जब तक बजट पास नहीं होता, तब तक कोई सब्सिडी नहीं दी जा सकती।

जब बजट पास नहीं हुआ, तो पैसा कहां से आया? कौन सी मद का पैसा सब्सिडी में खर्च कर रहे हैं, यह पता होना चाहिए। हम नकारात्मक सोच के साथ इस गठबंधन की शुरुआत नहीं करना चाहते।

अरविंदर सिंह लवली ने किया ‌आम आदमी पार्टी के फैसले से असल में पानी महंगा हुआ है। इसके अलावा उन्होंने बिजली पर फैसला किया। बिजली पर ‌सब्सिडी दी गई, तो वही काम हम कर रहे थे। आम आदमी पार्टी ने अलग क्या कर दिया?
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