केंद्र सरकार पर आम आदमी पार्टी (आप) का असर साफ दिखने लगा है। इसी के चलते केंद्र सरकार अब कोई भी कानून बनाने से पहले उस पर जनता की राय लेने को जरूरी बनाने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए सरकार एक प्रस्ताव तैयार करने पर विचार कर रही है। जिसमें यह अनिवार्य व्यवस्था होगी कि मंत्रालय कोई भी नया कानून बनाने से पहले उस पर जनता की राय लें।
इस प्रस्ताव की योजना पर आगे बढ़ने के लिए कैबिनेट सचिव सभी मंत्रालय और विभागों के सचिवों की बैठक बुलाएंगे।
केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस प्रस्ताव में व्यवस्था होगी कि केंद्रीय मंत्रालय जो भी नया कानून बनाना चाहते हैं उस पर पहले जनता की राय लें।
गौरतलब है कि आप की अब तक यह प्रमुख रणनीति रही है, दिल्ली में सरकार बनाने के पहले उन्होंने जनता की राय जानी।
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की यह रणनीति काफी सफल भी रही है, इससे उनकी पार्टी जनता के बीच और लोकप्रिय हुई। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कानून बनाने संबंधी नियमों में जरूरी बदलाव किया जा सकता है।
ऐसे में मंत्रालयों को नया कानून बनाने से पहले देश के आम आदमी, संस्थानों और एनजीओ की राय लेना जरूरी हो जाएगा। हालांकि किसी इमरजेंसी में मंत्रालयों को जनता की राय लेने से छूट भी मिल सकती है।