शाहजहां ने ताजमहल बनवाकर दुनिया के सामने प्रेम की मिसाल पेश की थी। अब कुछ इसी तरह का सपना महविश ने देखा है। सरकार से मिली 5 लाख रुपये की सहायता राशि को महविश अपनी मोहब्बत का एक ऐसा मकबरा बनवाने में खर्च करना चाहती है, जिसे आने वाले प्रेमी देखकर अब्दुल हकीम और उसके प्यार को याद कर सकें।
सरकार से बुधवार को मिले पांच लाख रुपये की सहायता राशि का चेक देखकर महविश की आंखों से आंसू छलक पड़े। उसे अपना भविष्य नहीं अब्दुल का प्यार याद आ रहा था। शौहर अब्दुल हकीम की यादों में खोई महविश ने कहा कि शाहजहां मुमताज से बेइंतहा प्यार करते रहे होंगे, तभी उन्होंने मुमताज की याद में ताज महल बनवाकर दुनिया के प्रेमियों के सामने एक मिसाल पेश की थी। आज भी देश और विदेश के प्रेमी युगल ताजमहल को देखकर शाहजहां और मुमताज के प्यार को याद करते हैं।
महविश ने बताया कि अब्दुल और अपनी मोहब्बत को जिंदा रखने के लिए वह भी कुछ ऐसा ही काम करना चाहती है। जिससे उनके बाद भी प्यार करने वाले महविश और अब्दुल की मोहब्बत को याद कर सकें। महविश ने बताया कि सरकार की ओर से मिली सहायता राशि से भाटगढ़ी में प्यार का मंदिर (मोहब्बत का मकबरा) बनवाएगी।
सीबीआई जांच की मांग
राज्यमंत्री और सपा अल्पसंख्यक प्रदेश सभा के अध्यक्ष डॉ. रियाज अहमद बुधवार को भाटगढ़ी पहुंचे। उन्होंने महविश को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा। इस महविश ने कहा कि पुलिस की जांच से वह संतुष्ट नहीं है। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। इस पर राज्यमंत्री ने मजिस्ट्रेटी जांच चलने की बात कही।
मुझे मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए
मंत्रीजी महविश को पांच लाख रुपये का चेक थमाकर चले गए, लेकिन चेक देखकर महविश की आंखों में आंसू भर आए। महविश ने बताया कि वह मुआवजे के लिए नहीं पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। मुझे इंसाफ चाहिए। मेरी आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी, जब तक हत्यारों को कोर्ट सख्त सजा नहीं सुनाएगी। इसके लिए वह संघर्ष करती रहेगी।