प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान से लौट आए हैं लेकिन उनकी यात्रा की खबरें अब भी मीडिया में छाई हुई हैं। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती के किस्से भी सुर्खियों में है।
एक धड़ा इस बात पर भी सिर खपा रहा है कि जापानी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी का जैसा स्वागत किया, वैसे पहले किसी राष्ट्राध्यक्ष का किया गया था या नहीं? पूछा ये भी जा रहा है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे और नरेंद्र मोदी की गहरी दोस्ती का राज क्या है?
वैसे शिंजो अबे का दिल में भारत के लिए क्यों धड़कता है, इसका एक कारण जरूर सामने आया है।
मेमोरियल में छिपा अबे के भारत प्रेम का राज
शिंजो अबे के भारत प्रेम का राज जापान की राजधानी टोक्यो में बने एक मेमोरियल में छिपा है। ये मेमोरियल राधा बिनोद पॉल का है, जो 1946 में दूसरे विश्वयुद्घ के युद्घ अपराधियों पर चले एक मुकदमे के जज थे।
टोक्यो के विवादित यासुकुनी मकबरे की जमीन पर बना पॉल मेमोरियल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस होटल से महज चार किमी की दूरी पर था, जहां वह ठहरे थे।
दरअसल, चालीस के दशक में पॉल कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे। उन्हें 11 जजों के उस पैनल में शामिल किया गया था, जिसे युद्घ अपराध में शामिल जापानी नेताओं के मुकदमे की सुनवाई करनी थी। उन 11 जजों में केवल पॉल ने ही जापानी नेताओं को युद्घ अपराधों का दोषी नहीं माना था। उन्हें निर्दोष करार दिया था।
अबे के दादा भी करते थे पॉल का सम्मान
पॉल की स्मृति में बना मेमोरियल यासुकुनी मकबरे से 100 मीटर की दूरी पर है। टेंपल यूनिवर्सिटी में एशियन स्टडीज विभाग के निदेशक जेफ किंग्सटन ने बताया कि पॉल ने जापानी नेताओं पर चल रहे मुकदमे की विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी।
जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के दादा और पूर्व प्रधानमंत्री नोबुसुके कीसी भी पॉल का सम्मान करते थे। नोबुसुके कीसी पर भी युद्घ अपराध के आरोप लगे, हालांकि उन पर मुकदमा नहीं चला।
शिंजो अबे प्रधानमंत्री बनने के बाद दिसंबर, 2013 में यासुकुनी मकबरे गए थे, जिसके बाद काफी विवाद भी हुआ था।