प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू का मानना है कि आज अस्सी फीसदी हिंदू तथा मुसलमान सांप्रदायिक हैं। इस सांप्रदायिकता का बीज भारत में 1857 के बाद अंग्रेजों ने बोया था।
उन्होंने कहा कि बंटवारे के बाद से पाकिस्तान तथा भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति सम्मानजनक नहीं है। यदि यह हालात न होते तो वर्ष 2002 में गुजरात में मुसलमानों तथा 1994 में दिल्ली में सिखों के साथ ऐसी घटनाएं नहीं होतीं।
पाकिस्तान की जेल में बंद भारत के सरबजीत पर लिखी पुस्तक के शनिवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में विमोचन समारोह में न्यायमूर्ति काटजू ने यह विचार व्यक्त किया। यह पुस्तक पाकिस्तान में सरबजीत के वकील अवैस शेख ने लिखी है। इस समारोह में पाकिस्तानी वकील व पुस्तक के लेखक अवैस शेख तथा सरबजीत की बहन दलबीर कौर भी उपस्थित थे।
अवैस शेख ने कहा कि मेरी पुस्तक, सरबजीत सिंह-ए केस ऑफ मिसटेकन आईडेंटिटी, वास्तव में वह सचाई है जिससे अभी तक आम पाकिस्तानी नागरिक रूबरू नहीं हुए हैं। इस किताब को राजकमल प्रकाशन ने हिंदी-अंग्रेजी में प्रकाशित किया है। शेख ने बताया कि इस पुस्तक का 24 फरवरी को पाकिस्तान में भी विमोचन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि देश में होने वाले अगले आम चुनाव से पहले सरबजीत की रिहाई हो जाए। उन्होंने कहा कि आज भारत तथा पाकिस्तान दोनों की जेलों में निर्दोष नागरिक सालों से बंद हैं। जो सजा पूरी कर चुके हैं वे भी अपने घरों को नहीं लौट पा रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों में सिविल सोसायटी से ऐसे मामलों के लिए आंदोलन चलाने जरूरत पर भी जोर दिया।