भारी बारिश और बाढ़ से पहाड़ों पर तबाही मची हुई है। उत्तराखंड और हिमाचल में दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश से अभी तक स्थिति खराब बनी हुई है।
पहाड़ों पर बारिश-बाढ़ का कहर, 68 लोगों की मौत
बारिश के कहर से कुल 73 लोगों की मौत हो चुकी है और चारधाम यात्रा के विभिन्न पड़ावों और धामों में 71 हजार 440 यात्री फंसे हुए हैं। चारधाम यात्रा के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा भी रोक दी गई है।
रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा, नहीं बचा नामोनिशान
तस्वीरों में: तबाही का मंजर
बाढ़ और बारिश से उत्तराखंड में 40, हिमाचल में 10 और यूपी के सहारनपुर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
तस्वीरों में: उफान पर यमुना
उत्तरकाशी से लेकर हरिद्वार और कुमाऊं तक की तमाम नदियां उफान पर हैं। गंगा खतरे के निशान से अब भी 1.2 मीटर ऊपर बह रही हैं।
बेकाबू हो रहे हालात से निपटने के लिए सेना और आईटीबीपी की मदद ली जा रही है।
हरिद्वार में बना हुआ है खतरा
हरिद्वार में बारिश बंद होने पर भी खतरा नहीं टला है। गंगा खतरे के निशान से ऊपर है। जल स्तर बढऩे के बावजूद भी गंगा दशहरा स्नान के लिए यहां लाखों श्रृद्घालु उमड़े।
आपदा पर भारी पड़ी आस्था, गंगा दशहरा पर उमड़ी भीड़
दिल्ली-दून नेशनल हाइवे पर यातायात सुचारू रूप से शुरू हो गया है। यहां मंगलवार सुबह से दोनों तरफ से वाहन गुजार रहे हैं। हरिद्वार-मुरादाबाद हाइवे पर अभी भी परेशानी है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
चिडिय़ापुर के समीप वाहन एक-एक कर गुजारे जा रहे हैं। यहां पुल क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित हुआ है। देहात के कई क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से बिजली गुल है, पथरी और बहादराबाद क्षेत्र के करीब 60 से अधिक गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं।
हालात थोड़े बेहतर भी
उत्तराखंड के नई टिहरी में सोमवार शाम 5 बजे से बारिश रुकी हुई है। यहां सुबह से कोहरा छाया हुआ है। टिहरी बांध का जल स्तर 774.8 आरएल तक पहुंच गया है। चंबा, धनौल्टी, मसूरी मार्ग सुवाखोली में बंद है और चंबा, धरासू राष्ट्रीय राजमार्ग कमांद भी नहीं खुले हैं।
जिले के 142 संपर्क मार्गो पर भी यातायात बंद है और लंबगांव क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई है। जौनपुर के जिजासु गांव में भूस्खलन के भय से गांव के 20 परिवारों ने गांव छोड़ दिया है और सुरक्षित स्थान के लिए छानियों (बरसाती गौशाला) में शरण ली है।
तस्वीरों में: उत्तराखंड में बारिश से तबाही
गोपेश्वर जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हुई बारिश के बाद आज मौसम साफ है, लेकिन लाखों की संपदा नदियों के तेज बहाव में बह गई है। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।
यहां गोविंदघाट, पाडुकेश्वर में हालत अब भी नाजुक हैं और कई तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम इसके लिए रवाना हो गई है।
हेमकुंड में बादल फटा
हेमकुंड यात्रा के पैदल मार्ग में पुलना गांव में बादल फटा है और 70 परिवार बेघर हो गए हैं। सम्पर्क मार्ग टूटने से राहत और बचाव कार्य में देरी हो रही है। शासन व प्रशासन हवाई मार्ग से राहत व बचाव के लिये तैयारी कर रहा है।
कर्णप्रयाग में सोमवार मध्य रात्रि को थराली बाजार में 6 मकान व दुकान बह गए हैं। लाखों का सामान भी बरबाद हो गया है। गैरसैंण में स्थिति सामान्य है। यहां कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
'भोले शंकर' से नाराज है गंगा मैया!
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्वीकार किया कि स्थिति बदतर है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में 450 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
मौसम केंद्र निदेशक आनंद शर्मा ने बताया कि मंगलवार शाम के बाद मौसम में कुछ हद तक सुधार की संभावना है।
राजमार्ग को रुड़की तक वन-वे करना पड़ा है। जनशताब्दी, हेमकुंड एक्सप्रेस, गंगानगर एक्सप्रेस रद्द होने से यात्रियों ने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर जमकर हंगामा किया।
वहीं, वेस्ट यूपी में गंगा और मालन नदी में उफान के कारण देर शाम बिजनौर के बाढ़ प्रभावित रावली और मंडावर इलाकों में सेना बुला ली गई है।
सहारनपुर में बारिश और बाढ़ से मकान की छत गिरने और कार के बहने से 18 लोगों की जान चली गई।
दिल्ली में बाढ़ का संकट, यमुना खतरे के निशान के पार
कहां कितने यात्री फंसे
- रुद्रप्रयाग जिले में रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के बीच करीब 25 हजार यात्री फंसे थे, केदारनाथ में फंसे हुए 350 लोगों को बचाया गया।
- उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर आए करीब 18 हजार यात्री फंसे हैं।
- चमोली में अलकनंदा के तेज बहाव से बदरीनाथ राजमार्ग जगह-जगह बह गया है।
- बदरीनाथ से गोविंदघाट तक करीब 25 हजार तीर्थयात्री फंसे हैं। जोशीमठ में क्रिकेटर हरभजन अभी भी फंसे हुए हैं।