महात्मा गांधी की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर कुल मिलाकर इतना खर्च नहीं हुआ, जितना कि कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर हुआ है। बा की पुण्यतिथि पर दो साल में 83 लाख रुपये खर्च हुए जो कि बापू की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर हुए कुल खर्च से 60 फीसदी ज्यादा है।
संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करने वाली गांधी स्मृति और दर्शन स्मृति ने सुभाष अग्रवाल की आरटीआई के जवाब में बताया कि पिछले साल 22 फरवरी को बा की पुण्यतिथि ‘निर्वाण दिवस’ पर प्रचार और निमंत्रण पत्र की छपाई पर 2.46 लाख रुपये खर्च हुए जबकि इस साल यह खर्च 2.68 लाख रुपये रहा।
इसके अलावा समिति ने 2011 में 30.44 लाख रुपये और 2012 में 47.17 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च किए। इसी दौरान महात्मा गांधी की जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर कुल 51.86 लाख रुपये खर्च हुए। 2 अक्तूबर को बापू की जन्मतिथि पर निमंत्रण पत्र की छपाई पर 4.62 लाख रुपये का खर्च हुआ जबकि इस साल यह खर्च 2.48 लाख रुपये रहा। समिति ने क्रमश: 8.73 लाख और 7.41 लाख रुपये खर्च किए। वहीं उनकी पुण्यतिथि पर पिछले साल 13.5 लाख और इस साल 15 लाख रुपये खर्च किए गए।