भारत में ऐसी कई भाषाएं हैं जो कई राज्य में बोले जाने के बावजूद मानक रूप में नहीं है। इसी तरह गोंडी भाषा में अभी किसी तरह का साहित्य या मीडिया नहीं है जिसे 6 प्रदेशों में रहने वाले सभी गोंडी भाषी समझ सकें।
क्योंकि हर इलाके में बोली जाने वाले गोंडी पर वहां की स्थानीय भाषा का बहुत अधिक प्रभाव है, यानी हमारे पास अभी हिन्दी-गोंडी है, तेलुगु- गोंडी और मराठी-गोंडी है।
यहां तक कि छत्तीसगढ़ में बस्तर के उत्तर और दक्षिण में बोले जाने वाली गोंडी में तक फर्क है।
ऐसा लगभग सभी भाषा के साथ होता है। भारत में बोले जाने वाली बांग्ला और बांग्लादेश में बोले जाने वाली बांग्ला में बहुत फर्क है यहां तक कि बांग्लादेश के उत्तर में बसे सिलेट जिले में बोले जाने वाली बांग्ला और दक्षिण में बसे चिटगांव की बांग्ला एक दूसरे से बिलकुल अलग है।
पर भारत हो या बंगलादेश, चिटगांव हो या सिलेट सभी बीबीसी की बांग्ला सर्विस को सुनते हैं और उस बांग्ला को समझते हैं। ठीक इसी तरह हमें एक ऐसे मानक गोंडी की ज़रुरत है। इस दिशा में काम करने के लिए 21 से 26 जुलाई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से स्वर टीम एक कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
स्वर टीम गोंडी भाषा पर लगातार काम कर रही है। और इनकी वेबसाइट(www.adivasiswara.org) संभवत: दुनिया की एकमात्र ऐसी वेबसाइट है जिसकी लगभग पूरी स्क्रिप्ट गोंडी भाषा में है।