देशभर में तेजी से बढ़ रहे अपराध का आलम यह है कि इस साल के अंत तक ऐसा मामलों की संख्या एक करोड़ के आसपास तक पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की बड़ी संख्या में कमी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की निर्धारित संख्या 1044 के बजाय महज 599 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक देशभर के उच्च न्यायालयों में करीब 43 फीसदी न्यायाधीशों की कमी है जिसकी वजह से लंबित मामलों की सुनवाई का निपटारा तेजी से नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौजूदा समय में लंबित मामलों की संख्या 45 लाख के करीब है जो तेजी से बढ़ता जा रहा है। वहीं न्यायालयों में निर्धारित न्यायाधीशों की संख्या 1044 है जो फिलहाल महज 599 न्यायाधीशों तक ही सीमित है जिसकी वजह से मामलों की त्वरित निपटारे में कमी आई है।
न्यायाधीशों की त्वरित नियुक्ति में हो रही देरी की मुख्य वजह विधायिका और न्यायपालिका के बीच जारी संवैधानिक तनातनी को माना जा रहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की वैधता को ही निरस्त कर दिया है जिसके बाद यह समस्या सामने आई है।