देश की सुरक्षा में तैनात सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) के जवानों को एक 'नए दुश्मन' से खतरा है। यह 'दुश्मन' इन जवानों को धीरे-धीरे मौत की मुंह में ले जा रहा है।
इन जवानों का 'नया दुश्मन' है एड्स/एचआईवी।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में बताया है कि एड्स से पिछले सात सालों में 391 जवानों की मौत हुई है।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक परिवार से दूर तैनात जवान इस बीमारी के ज्यादा चपेट में आए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति मिशन में तैनात जवान भी इस बीमारी के शिकार हुए हैं।
फिलहाल सीएपीएफ में 1300 से अधिक जवान ऐसे हैं जिन्हें एड्स है, जबकि 1600 से अधिक नए मामले सामने आए हैं।
पिछले साल लगभग सभी सुरक्षा बलों में एड्स से सबसे अधिक मौत के मामले बीएसएफ में सामने आए थे। पिछले साल बीएसएफ में 43, सीआरपीएफ में 15 और असम राइफल्स में 7 जवानों की मौत हुई थी।
गृह मंत्रालय के मेडिकल विभाग ने पिछले माह सीएपीएफ में बढ़ती इस बीमारी पर चर्चा की थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2007 में 534 मामले सामने आए थे लेकिन पिछले साल केवल 78 मामले ही सामने आए। जवानों को जागरुक करने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
एड्स के प्रति जागरूकता के लिए गृह मंत्रालय ने सभी सुरक्षाबलों को अलग से धनराशि जारी की है। साथ ही इस बीमारी का पता लगाने के लिए परीक्षण भी कराए हैं।
बताया जा रहा है कि एड्स के प्रति जागरूकता अभियान का एक अधिकारी जल्द ही जवानों के प्रशिक्षण कोर्स का हिस्सा बनेगा।
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर एड्स से मरने वालों का प्रतिशत 0.27 था जबकि सीएपीएफ में यह 0.18 फीसदी था।
एक अधिकारी ने बताया कि हालात में पहले से सुधार हो रहा है। सुरक्षा बलों में छह लाख 40 हजार से अधिक जवानों का परीक्षण किया गया है। 1361 जवान एड्स या एचआईवी से पीड़ित हैं। यह कोई चिंताजनक आंकड़े नहीं हैं लेकिन इसमें कमी लाने के लिए तत्काल उपाय किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले सात सालों में 1633 मामले सामने आए हैं, जिनमें 78 मामले 2012 के हैं। नए मामले सामने न आए इसके लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।