मिर्जापुर में 33 साल पहले हुए डॉ. धर्नीधर त्रिपाठी हत्याकांड में तीन दशक बाद भी आरोप निर्धारित न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने दो अभियुक्तों और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च अदालत ने सभी प्रतिपक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने को कहा है।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मृतक के बेटे डॉ. पंकज त्रिपाठी की विशेष अनुमति याचिका पर अभियुक्त विजय कुमार मिश्र तथा जीत नारायण मिश्र को नोटिस जारी किया है। धर्नीधर त्रिपाठी की 25 मई, 1980 को मिर्जापुर में हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने रामचंद्र मिश्र और हैदर अली के खिलाफ सितंबर 1980 में आरोप पत्र दायर किया था। लेकिन साथ ही जांच पूरी करने के लिए एक माह का अदालत से समय मांगा था। अभियुक्तों द्वारा वारदात के दिन अपने आप को जेल में बंद होने का प्रमाण देने पर निचली अदालत ने दोनों को 1981 में आरोप मुक्त कर दिया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संजय सिंह ने पीठ को बताया कि पुलिस ने इसके बाद 1988 में पूरक आरोप पत्र अदालत में दायर किया। इसमें विजय कुमार मिश्र और जीत नारायण मिश्र को अभियुक्त बनाया गया।
अदालत की मूल फाइल गायब होने के कारण केस 1995 से लेकर 2008 तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा। मई, 2009 में हाईकोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई प्रतिदिन करने का ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया। लेकिन फरवरी 2010 में हाईकोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। उसके बाद से मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अभियुक्तों की राजनीतिक पहुंच होने के कारण 33 साल से मामला लटका हुआ है। आरोप निर्धारित होने के बाद ही गवाही शुरू हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अभियुक्तों का आपराधिक रिकॉर्ड भी पेश किया गया है। याची ने कहा कि विधायक विजय मिश्र के खिलाफ 60 से भी ज्यादा फौजदारी के मामले दर्ज हैं।