कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल पर आरोप है कि लापरवाही के कारण वहां पिछले चार दिनों में तीस से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है।
बच्चों के माता-पिता का कहना है कि बीसी रॉय पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ पीडिएट्रिक साइंसिज़ अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्चों को सही दवाएं नहीं दीं और अस्पताल का प्रबंधन भी ठीक नहीं था।
लेकिन अस्पताल के प्रशासन का कहना है कि बच्चों को गंभीर हालात में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और मामला डॉक्टरों के हाथ से बाहर चला गया था।
मुफ्त इलाज मुहैया कराने वाले इस अस्पताल को 2011 में दो दिन में 18 बच्चों की लापरवाही के कारण मौत के आरोप से मुक्त कर दिया गया था।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने अस्पताल सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि 35 बच्चों की मौत हुई और इन सभी को मरणासन्न हालत में अस्पताल लाया गया था।
अस्पताल ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ़ द्वारा किसी भी कोताही से इनकार किया है।
'क्लीन चिट'
सूत्रों के मुताबिक राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी जिसने अस्पताल पर किसी भी तरह की लापरवाही के आरोप को खारिज किया था और अस्पताल को 'क्लीन चिट' दी थी।
अस्पताल के स्टाफ़ की मदद के लिए आठ बाल विशेषज्ञ भेजे गए थे।
बच्चों के स्वास्थ्य का निरीक्षण करने वाली कार्य समिति के प्रमुख त्रिदिब बैनर्जी ने कहा, "स्वास्थ्य विभाग मुख्य मंत्री ममता बनर्जी के निर्देशानुसार बच्चों की देखरेख के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।"
इसी अस्पताल में बच्चों की मौत पर वर्ष 2011 में भी बवाल हुआ था जब एक जुलाई को 48 घंटे के भीतर 18 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था।