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शाह की ताजपोशी से 'बुजुर्ग सेना' रही दूर, मंत्रिमंडल विस्तार की उल्टी गिनती शुरू

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली और आखिरी पसंद अमित शाह को एक बार फिर से भाजपा का निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया है। बतौर भाजपा अध्यक्ष शाह का तीन साल का यह पहला पूर्ण कार्यकाल होगा। रविवार को ही शुरू हुई निर्वाचन प्रक्रिया में शाह के पक्ष में पीएम मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित 17 नेताओं का प्रस्ताव रखा गया।
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इस दौरान किसी दूसरे नेता की ओर से नामांकन प्रस्ताव न आने के बाद चुनाव अधिकारी अविनाश राय खन्ना ने शाह के दोबारा अध्यक्ष चुने जाने का एलान कर दिया। इस दौरान पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री, पार्टी शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री, सभी राज्यों के अध्यक्ष उपस्थित थे।

हालांकि इस पूरे समारोह से पार्टी की बुजुर्ग सेना दूर रही। मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ-साथ शांता कुमार और यशवंत सिन्हा पार्टी मुख्यालय और समारोह से दूर रहे। शाह के बतौर अध्यक्ष मिले तीन साल के कार्यकाल पर मुहर लगाने के लिए 28 जनवरी को पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक होगी।
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बहरहाल पूर्णकाल मिलने के बाद बीते लोकसभा चुनाव से चर्चा में आई पीएम मोदी और शाह की जोड़ी साल 2019 के लोकसभा चुनाव से दो-तीन माह पहले तक बनी रहेगी। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद शाह को फिर अध्यक्ष बनाने को लेकर कुछ नेताओं ने सवाल उठाए थे, लेकिन संघ की ओर से पीएम मोदी की पसंद को हरी झंडी मिलने के बाद शाह को तीन साल का पूर्ण कार्यकाल देने की औपचारिकता पूरी कर ली गई।

उत्तर प्रदेश ने दिलाई पहचान

महज तीन घंटे चली चुनाव प्रक्रिया के दौरान पहले शाह के समर्थन में विभिन्न नेताओं की ओर से तैयार प्रस्ताव पेश किए गए। प्रस्ताव पेश किए जाने के चंद मिनट बाद ही शाह को एक और कार्यकाल देने का एलान कर दिया गया। एलान के साथ ही शाह को बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। सबसे पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके बाद सरकार के कई अन्य मंत्रियों, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें बधाई दी।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शाह को उत्तर प्रदेश के नतीजे ने नई पहचान दिलाई। इस दौरान इस सूबे की रणनीति का जिम्मा संभाल रहे शाह ने राज्य की 80 में से 71 सीटों पर पार्टी और दो पर सहयोगी दल को जीत दिला कर सबको चौंका दिया। इसके बाद सरकार में राजनाथ के गृहमंत्री बनने के बाद शाह को भाजपा की कमान दी गई।

2014 में ही शाह ने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में पार्टी को सत्ता में काबिज कराकर अपना कद बहुत ऊंचा कर लिया। हालांकि साल 2015 शाह के लिए अच्छा नहीं रहा। शुरुआत में जहां पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी, वहीं साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी चारो खाने चित रही।

मंत्रिमंडल विस्तार की उल्टी गिनती शुरू

अमित शाह की भाजपा अध्यक्ष के रूप में एक और पारी पर मुहर लगने के साथ ही संगठन की नई टीम के साथ-साथ मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नई टीम और मंत्रिमंडल विस्तार पर मंथन का दौर 28 जनवरी को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद शुरू होगा।

इस क्रम में संगठन के कई चेहरे सरकार के चेहरे बनेंगे तो सरकार के कई चेहरों को संगठन में नई जिम्मेदारी संभालनी होगी। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही संगठन को चुस्त दुरुस्त करने, संतुलन साधने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संगठन खासकर चुनावी कार्यक्रमों में ज्यादा इस्तेमाल न करने की रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा शुरू हुई थी।

माना जा रहा है कि शाह की नई टीम और मंत्रिमंडल विस्तार फरवरी महीने के दूसरे सप्ताह में होगा।
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वाजपेयी, आडवाणी और जोशी से शाह ने की मुलाकात

भाजपा अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी के बाद अमित शाह ने पार्टी के बुजुर्ग नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की। हालांकि मार्गदर्शक मंडल में शामिल आडवाणी, जोशी के साथ-साथ वरिष्ठ नेता शांता कुमार और यशवंत सिन्हा चुनाव समारोह में नहीं पहुंचे।

अन्य नेताओं की तरह इनकी तरफ से शाह की उम्मीदवारी के पक्ष में प्रस्ताव भी नहीं दिए गए। बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली बुजुर्ग सेना की ओर से शाह के लिए बधाई संदेश भी नहीं आया।
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