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2013 के 13 रंग जिसमें हैं खुशी और गम

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साल की शुरुआत महाकुंभ के आगाज के साथ भी हुई। देश और दुनिया के सबसे बड़े मेले ने खूब चर्चा बटोरी। करोडों लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। हालांकि बेहद शांतिपूर्ण कहे जाने वाले इस महाकुंभ की विदाई होते होते एक दाग भी लग गया। यहां मची एक भगदड़ में कुछ श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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हर ओर नमो-नमो का जाप

मिशन 2014 के लिए भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी की ताजपोशी ने इस साल खूब चर्चा बटोरी। चार राज्यों के विधानसभा चुनाव की अग्निपरीक्षा में भी मोदी खरे उतरे। चुनाव में जीत को मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों और उसमें जुटी भीड़ से जोड़ा गया। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत की राह आसान नहीं है।

मंगल पर मनाया भारत ने उत्सव

लाल ग्रह के रहस्यों का पता लगाने में जुटे दुनिया के चंद देशों में भारत भी शुमार हो गया। पांच नवंबर को श्रीहरिकोटा से मंगलयान के सफल प्रक्षेपण से भारत ने अंतरिक्ष में कामयाबी की नई इबारत लिख दी। इसके साथ ही हिंदुस्तान अमेरिका, रूस और यूरोप के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया। तकरीबन 450 करोड़ रुपये की लागत वाला यह मिशन 40 करोड़ किलोमीटर का सफर तय करके सितंबर, 2014 में पहुंचने वाले इस मिशन के साथ मार्स आर्बिटर नाम के उपग्रह को भेजा गया है।

आप का अद्भुत अभ्युदय

अन्ना हजारे के साथ जनलोकपाल आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया। अन्ना से मतभेदों के बावजूद आप ने साल भर में ही दिल्ली के आम आदमी के दिल में अपनी जगह बना ली। आप दिल्ली विधानसभा चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और सरकार बनाने में कामयाब रही।

रसातल में रुपया, महंगाई की मार

यह साल रुपये के अब तक के सबसे निचले स्तर पर (28 अगस्त को डॉलर के मुकाबले 68.80 रुपया) पहुंचने का भी रहा तो आम आदमी पर महंगाई की मार का भी रहा। इसका असर घरों के लोन, सोने की बढ़ती कीमतों समेत सब्‍जियों, तेलों जैसे रोज-मर्रा की जिंदगी की हर जरूरतों पर पड़ा। महंगाई से जनता पूरे साल जूझती रही। सरकार ने हरसंभव कोशिश की, मगर महंगाई नहीं थमी। कीमतों में बेतहाशा बढोत्तरी ने जनता की कमर तोड़ दी।

क्रिकेट के संत सचिन का संन्यास

क्रिकेट के संत सचिन तेंदुलकर ने साल के आखिर में संन्यास ले लिया। मुंबई के वानखेड़े में अपने 200वें टेस्ट में लोगों ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। क्रिकेट को जेंटलमैन का खेल कहे जाने को भारत के इस रत्न ने सही साबित किया। तकरीबन हर फार्मेट में रिकार्ड बनाने वाले इस क्रिकेटर की मैदान में कमी सबको खलेगी।

लोकपाल का पास होना

देश की संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त औजार के रूप में आखिरकार साढ़े चार दशक बाद अब देश को लोकपाल कानून मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और विपक्षी पार्टियों के दबाव में आकर पास हुए लोकपाल बिल को बस राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसकी जांच के दायरे में अब प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद और केंद्र सरकार के समूह ए,बी,सी और डी के अधिकारी कर्मचारी आएंगे।

दरिंदों को सजा-ए-मौत

साल की शुरुआत बेहद गमगीन माहौल में हुई। नया साल शुरू होने के चंद दिनों पहले दिल्ली गैंगरेप की शिकार बिटिया की मौत ने देश ही नहीं दुनियाभर में लोगों को झकझोर कर रख दिया। लोग जनवरी में कड़ाके की सर्दी में घरों से सड़कों पर निकल पड़े। हर तरफ बिटिया के लिए इंसाफ की आवाजें बुलंद हुईं। असर यह रहा कि कई कानूनों में अहम बदलाव किए गए और आखिरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट ने छह में से चार दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई। जबकि एक ने जेल में ही आत्महत्या कर ली और दूसरे को जुवेनाइल कोर्ट ने तीन साल की सजा दी।

आतंक के गुरू का अंत

संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरू की फांसी भी इस साल की चर्चित घटनाओं में से एक रही। बेहद गुपचुप तरीके से तिहाड़ जेल में दी गई फांसी के जरिये भारत ने अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान समेत दुनिया को सख्त लहजों में यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खात्मे के लिए वह कितना प्रतिबद्ध है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कुदरत का कहर

उत्तराखंड में आए प्राकृतिक आपदा ने देश को झकझोर कर रख दिया। दरकते हुए पहाडों में हजारों हंसती खेलती जिंदगियां यों ही काल के गाल में समा गईं। कई गांवों का नामोनिशान मिट गया। आपदा ने तंत्र की नाकामी की पोल खोली। साथ ही कुदरत से छेड़छाड़ पर सवाल भी खड़े किए। ऐसे मौके पर सेना आपदा में फंसे लोगों के लिए देवदूत बनकर उतरी।

लोकतंत्र के मंदिर का हाल

इस साल संसद का पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। 15वीं लोकसभा में 1000 घंटे यूं हीं हो-हल्‍ले में बर्बाद हो गए। इसमें राज्‍यसभा में 423 और लोकसभा में 577 घंटे सिर्फ हंगामा हुआ। संसदीय इतिहास में यह सबसे ज्यादा हंगामेदार सेशन बना। हालांकि, इसके बाद भी संसद में फूड बिल, लैंड बिल, लोकपाल बिल और पेंशन बिल जैसे कुछ अहम विधेयक पास हुए।

अलविदा मदीबा

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अहिंसक संघर्ष करने वाले मदीबा इस दुनियां काे छोड़कर चले गए। बगैर टूटे अपनी जिंदगी के 27 साल जेल में बिताने वाले नेल्सन मंडेला अपनी मनमोहक मुस्कान से दुनिया को हमेशा संघर्ष के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
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बॉलीवुड हुआ प्राणहीन

पर्दे के सज्जन खलनायक के निध्‍ान से बॉलीवुड प्राणहीन हो गया। फिल्म खानदान से पदार्पण करने वाले प्राण किशन सिकंद ने अभिनय की ऐसी लकीर खींची कि वह सदियों तक आने वाले अभिनेताओं के लिए मिसाल रहेगी। वहीं सुर के साधक मन्ना डे और सुरों की मल्लिका शमशाद बेगम की चिर खामोशी ने भी संगीत जगत को मायूस किया।
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