1993 मुंबई बम ब्लास्ट मामले में सिने स्टार संजय दत्त सहित दोषी करार दिए गए सौ आरोपियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को फैसला सुनाएगा।
सर्वोच्च अदालत इस मामले में दोषियों और सीबीआई की अपील पर अंतिम आदेश जारी करेगी।
दोषियों ने जहां सजा के खिलाफ अपील की है, वहीं सीबीआई ने सजा बढ़ाने की मांग दायर की है। टाडा कोर्ट ने 12 को मौत की सजा सुनाई है जबकि 20 को उम्रकैद की सजा दी है।
जस्टिस पी सदाशिवम् व जस्टिस बीएस चौहान की पीठ ब्लास्ट की घटना के 19 साल बाद अपना फैसला जारी करेगी। संजय दत्त ने इस मामले में उनके नेक चाल-चलन (अच्छे आचरण) को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोष मुक्त किए जाने की गुजारिश भी की है।
अपने बचाव में दत्त ने टाडा कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील में यह दलील दी है। मालूम हो कि विशेष अदालत ने दत्त को 21 जुलाई, 2001 को आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार रखने के जुर्म में छह साल की सजा सुनाई थी।
हालांकि उन्हें अदालत ने आतंक रोधी कानून टाडा के आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके बाद दत्त ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया और 27 नवंबर, 2007 को उन्हें जमानत मिल गई।
सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई की ओर से आरोपियों की सजा बढ़ाने की मांग वाली अपील में 880 दिन की देरी पर कई सवाल किए थे।
हालांकि विशेष टाडा अदालत के 4300 पेज के फैसले को गंभीरता से जांचने की वजह से देरी होने की दलील पर पीठ संतुष्ट हो गई थी। टाडा अदालत ने मुंबई ब्लास्ट मामले में सौ लोगों को दोषी करार दिया है।
सीबीआई ने दत्त को टाडा के आरोपों से मुक्त किए जाने के विशेष अदालत के फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती नहीं दी है। मुंबई में हुए इन सीरियल ब्लास्ट में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा घायल हो गए थे।