शायद इस्लामिक (आईएस) स्टेट का प्रभाव अब धीरे-धीरे भारत में भी बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि हाल के दिनों में लापता हुए 17 भारतीय नौजवानों के इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी आशंका के तहत पिछले महीने गृह मंत्रालय ने 12 राज्यों के डायरेक्टर्स जनरल ऑफ पुलिस और गृह सचिवों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस बैठक में ऐसे भारतीय नौजवानों के मामलों पर बात की गई थी जिन पर सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि ये इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने इस बात की आशंका जाहिर की थी कि कई भारतीय नौजवान इस्लामिक स्टेट से जुड़े गए हैं लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि फिलहाल भारत इस्लामिक स्टेट के प्रभाव से अछूता है।
घाटी में लहराए गए थे IS के झंडे
सुरक्षा एजेंसियों को पूरा यकीन है कि लापता हुए 17 भारतीय नौजवान इस्लामिक स्टेट में या फिर जबात अल-नुसरा जैसे दूसरे आतंकी संगठनों में शामिल हो गए हैं। एजेंसियों के इस इनपुट से सरकार की भी चिंताएं बढ़ी हैं।
इस रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इंडियन मुजाहिद्दीन के कई ऐसे लड़ाके हैं जो इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गए है। इतना ही नहीं हाल ही में पुलिस ऐसे 22 नौजवानों को रोकने में कामयाब रही जिन्हें आईएस में शामिल होने का बुलावा आया था।
हाल के ही दिनों में घाटी का माहौल भी तेजी से बदला है। जम्मू कश्मीर के कई हिस्सों में अलगाववादियों की रैलियों में इस्लामिक स्टेट के झंडे लहराए गए थे। इंडियन एक्सप्रेस ने उन 17 भारतीय नौजवानों के परिवार से भी बातचीत की जिन पर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का शक है।
पाकिस्तान में जमा रहा है पैर
सभी परिवारों से बात करने पर जो बातें सामने आईं उनमें यह बात तो साफ थी की सभी नौजवान पढ़े लिखे, मध्यम वर्गीय और संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते थे। उनके किसी भी आतंकी संगठन या नेताओं से कोई संबंध नहीं थे।
हां, इन सभी 17 भारतीयों में एक समानता जरुर थी। गायब होने से पहले ये सभी मिडल ईस्ट देशों में काम कर रहे थे। हाल ही में भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की पाकिस्तान समर्थित कश्मीर में इस्लामिक स्टेट का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
सेना के 16 कार्प्स के लेफ्टिनेंट जनरल केएच सिंह ने बताया कि हमारे पास अब तक जो जानकारियां आई हैं उससे एक बात तो साफ हो जाता है कि आईएस ने पूरी तरह से पाकिस्तान समर्थित कश्मीर पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ा है। लेकिन वे अपने पांव जमाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।