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गलती से भौंका पुलिस का कुत्ता, बेगुनाह को उम्रकैद

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पुलिस के वफादार कुत्ते अक्सर हत्या, चोरी-डकैती, ब्लास्ट जैसी घटनाओं में संदिग्धों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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लेकिन ऐसा ही एक वफादार कुत्ता मुम्बई के एक आदमी के लिए मुसीबत बन गया।

मुम्बई के सोलापुर इलाके में हुई हत्या के मामले में राजाराम को शक के आधार पर सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया कि छानबीन के वक्त पुलिस का कुत्ता उन पर भौंका था।

हाईकोर्ट ने किया रिहा

इस मामले में पिछले 10 सालों से उम्रकैद की सजा काट रहे राजाराम को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए मुम्बई हाईकोर्ट ने कहा कि जिस आधार पर उन्‍हें आरोपी बनाकर पिछले 10 साल से जेल में रखा गया है, वे कोई ठोस सबूत नहीं माने जा सकते हैं।

और इसीलिए यदि किसी अन्य मामलें में व्यक्ति पर कोई मुकदमा न दर्ज हो तो उसे तत्काल रिहा कर दिया जाए।

इस मामले पर न्यायधीश पी.वी.हरदास और अजय गडकरी की स्पेशल बेंच ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला देते हुए आरोपी राजाराम को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए।
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क्या था मामला?

यह मामला 2004 का था। मुम्बई के सोलापुर में रहने वाले राजाराम के पड़ोसियों की हत्या हो गई। पड़ोसियों की लाश राजाराम के घर के सामने पाई गई।

पूछताछ में यह बात सामने आई कि राजाराम और उसके पड़ोसियों में पाइपलाइऩ को लेकर कोई विवाद था। छानबीन में पुलिस के ट्रैंकिंग डॉग ने संदिग्‍ध के रूप में राजाराम पर भौंक कर उसकी पहचान की।

ट्रायल कोर्ट में राजाराम को उम्रकैद की सजा हुई, जिसके बाद उसने मुम्बई हाईकोर्ट में केस दायर किया। पुलिस की छानबीन में लाश के पास ट्रैकर डॉग को ले जाया गया था। जिसके बाद ट्रैकर डॉग राजाराम के पास जाकर भौंका था।

न्‍यायधीशों की बेंच ने कहा कि चूंकि लाशें राजाराम के घर से सामने थी, इसलिए इस बात की संभावना है ‌कि राजाराम उनके संपर्क में आ गया हो। और इसके अलावा और दूसरे कोई ठोस सबूत न होने के कारण महज एक आशंका के तहत उसे उम्रकैद की सजा देना बेहद निर्मम है। और इस फैसले के साथ दस साल बाद राजाराम को रिहा कर दिया गया।
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