प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने भारत के सभी बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून पेश कर भारत को उन 135 देशों में शामिल करवा दिया जहां ऐसा कानून पहले से मौजूद है। 4 अगस्त 2009 को भारतीय संसद में पास हुआ कानून यूपीए-2 की मत्वपूर्ण उपलब्धि रही है।
नेताओं से मांगी जा रही है सूचना
यूपीए सरकार ने अपने पहले 5 साल में देश की जनता को सूचना का अधिकार के रूप में एक सशक्त कानून बनाकर दिया। इस कानून के जरिए आम जनता अब सभी सरकारी विभाग से ऐसे सवाल पूछ रही है, जिसने खुद यूपीए सरकार को संकट में ला खड़ा किया है। इसी कानून की बदौलत यूपीए सरकार के कई घोटाले सामने आए हैं।
काफी जद्दोजहद के बाद देश को मिला लोकपाल
यूपीए सरकार ने काफी विरोध और आंदोलन को देखने के बाद आखिरकार देश की जनता को लोकपाल के रूप में कानून दे ही दिया। इस कानून के लिए अन्ना हजारे ने अलग-अलग मौकों पर कई आंदोलन किए।
गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा गारंटी
12 सितंबर 2013 को देश को खाद्य सुरक्षा गारंटी के रूप में एक नया कानून मिला। यूपीए सरकार ने गरीबों के लिए 3 रुपये किलो चावल, 2 रुपये किलो गेंहू और 1 रुपये किलो अनाज देने का फैसला किया है। इस कानून को बनाने के लिए यूपीए सरकार अपने सहयोगी पार्टियों से भी बैर मोल लेना पड़ा। कहा जा रहा है कि अगले चुनाव में इस कानून का कुछ फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
गरीबों को है रोजगार का अधिकार
नरेगा और मनरेगा नाम से प्रचलित यह कानून गरीबों को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देता है। देश के 200 जिलों से शुरु किया गया यह कानून अब देश के सभी जिलों में लागू हो गया है। विशलेषकों का मानना है कि यूपीए सरकार को दोबारा चुनाव जिताने में इस कानून का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकार भी इस कानून को कई बार अपने उपलब्धियों में गिनाती रही है।
भूमि अधिग्रहण कानून जरिए किसानों को राहत
यूपी के नोएडा की भट्टा पारसौल और बंगाल के नंदीग्राम की घटना ने देश की सरकार को एक कड़ा कानून लाने पर मजबूर कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस कानून की जमकर तारीफ की। 1 जनवरी 2014 से यह कानून पूरे देश में लागू हो चुका है। इस कानून के तहत किसी की जमीन अधिग्रहण करने के लिए उन्हें उचित मुआवजा देना होगा।
आधार कार्ड के जरिए लोगों को मिली पहचान
यूपीए सरकार की इस फ्लैगशिप परियोजना के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंफोसिस के संस्थापक सदस्य नंदन निलेकणि को विशेष रूप से इसकी जिम्मेदारी सौंपी। देश के सभी नागरिकों को पहचान देने के लिए शुरू की गई आधार कार्ड परियोजना से भ्रष्टाचार पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
महिलाओं के लिए विशेष कानून
दिल्ली गैंगरेप के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जेएस वर्मा के नेतृत्व में एक नया कानून बनाया, जिसके तहत महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आईपीसी में बदलाव किए गए। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के 3 फरवरी 2013 को हस्ताक्षर करने के बाद यह कानून बन गया। महिलाओं पर एसिड अटैक से लेकर यौन शोषण तक में इस पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
भेद खोलने वालों को मिलेगी सुरक्षा
देश की जनता को समर्पित यह कानून उनलोगों को सुरक्षा देने की गारंटी देती है, जिन्होंने देश हित में सरकार या सरकारी विभाग के खिलाफ कोई ऐसी सूचना दी है जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसे व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन कानून कहा जाता है। हालांकि इसका सही से इस्तेमाल हो पाना मुश्किल जान पड़ता है। हालांकि यूपीए सरकार इसे भी अपनी उपलब्धि बताती रही है।
महिलाओं को पंचायतों में आरक्षण
केंद्र सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने का कानून पास कर महिलाओं की स्थिति मजबूत की है। 27 अगस्त 2009 को पास इस कानून के तहत पंचायतों में महिलओं को 50 फीसदी का आरक्षण मिलने लगा है।