भू राजस्व अभिलेखों में मृत घोषित कर दिए गए देश के करीब सवा लाख लोग खुद को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूर्वांचल में ऐसे लोगों की संख्या करीब 15 हजार है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिए भी लोगों से मदद मांगी जा रही है।
पूर्वांचल के इन लोगों ने ‘मृतक संघ’ नाम से संगठन बनाया है। संगठन 29 जून को जिला मुख्यालयों पर मृतक पुनर्जन्म दिवस मनाएगा। इस दौरान मांगें मनवाने के लिए प्रदर्शन भी किया जाएगा। संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर उनसे मदद मांगी है।
पूर्वांचल में 15 हजार से ज्यादा लोग
संघ के अध्यक्ष आजमगढ़ निवासी लाल बिहारी को 30 जुलाई 1976 भू राजस्व अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया था। वर्षों की जद्दोजहद के बाद लाल बिहारी को 1994 में जिंदा घोषित किया गया। संघ में पूर्वांचल के करीब 15 हजार ऐसे लोग हैं, जिन्हें जिंदा होने के बावजूद रिकार्ड में मृत घोषित कर दिया गया है।
कुछ इसी तरह की कहानी वाराणसी के चौबेपुर के रहने वाले संतोष मूरत सिंह उर्फ ‘मैं जिंदा हूं’ की है। संतोष वर्ष 2000 में नौकरी के लिए मुंबई चले गए थे। 2003 में उन्हें राजस्व अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया।
जंतर मंतर पर दिया धरना
खुद को नाना पाटेकर का कुक बताने वाले संतोष ने अपने को जिंदा साबित करने के लिए वर्ष 2012 में दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर करीब एक साल तक धरना दिया।
आखिरकार 2013 में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हस्तक्षेप पर संतोष को जिंदा घोषित किया गया।
आजमगढ़ के सगड़ी निवासी रामअवतार यादव और मऊ के मोहम्मदाबाद की धिराजी देवी (75) अभिलेखों में मृत घोषित की जा चुकी हैं। खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने मंत्रियों से लेकर अफसरों तक गुहार लगाई लेकिन अब तक मदद नहीं मिली।