केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने अपने एक चपरासी को अपना निजी सहायक बनाने के लिए तय शैक्षिक योग्यता के मानदंडों में राहत दिलवाई है।
साथ ही मोइली के अनुरोध पर प्रधानमंत्री इस कार्य के लिए संबंधित मंत्रालय को ही अधिकार देने पर भी विचार कर रहे हैं।
पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से अपने चपरासी शुभ नंदन कुमार को अपने निजी स्टाफ में शामिल करने के लिए नियमों में बदलाव की मांग की थी। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के योग्यतामानदंडों में बदलाव करने के बाद ये मांग की गई थी।
आरटीआई कार्यकर्ता एससी अग्रवाल को पीएमओ से आरटीआई के जरिये मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त में पीएमओ ने चपरासियों के लिए शैक्षिक योग्यता के मानदंडों में कमी करने का अधिकार संबंधित मंत्रालयों को देने के प्रस्ताव को पास किया था। अन्य स्टाफ में ऐसे मामलों के अधिकार कैबिनेट सचिव को दिए गए।
जबकि इन बदलावों से पहले मंत्रियों को तय नियमों के अनुसार केवल अपने निजी स्टाफ की नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त था।
आठवीं से दसवीं हुई थी योग्यता
ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में आने वाले कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता पहले आठवीं कक्षा रखी गई थी बाद में छठे वेतन आयोग की सिफारिश के बाद इसे बढ़ाकर दसवीं कर दिया गया। इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया था।
मंत्रियों के निजी स्टाफ की आयु सीमा को कम करने की शक्तियां कैबिनेट सचिवालय को सौंपी गई हैं, जबकि शैक्षिक योग्यता में कमी केवल प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं।
शुभ नंदन कुमार का मामला कैबिनेट सचिव के जरिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक पहुंचा, जिस पर शैक्षिक योग्यता कम करने की सिफारिश की गई थी।
इस सिफारिश के आधार पर प्रधानमंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया और अधिकार सौंपने के प्रस्ताव को विचार के लिए बढ़ा दिया।