अमर उजाला डॉट कॉम की तरफ से आयोजित 'मिस घनचक्कर' में विनर को ताज पहनाने पहुंची विद्या बालन ने अमर उजाला से अपनी फिल्म 'घनचक्कर' के बारे में खासतौर पर बातचीत की। आइए जानें, 'घनचक्कर' की कहानी विद्या की जुबानी।
'घनचक्कर' में पंजाबी कुड़ी का आपने किरदार निभाया है, पंजाबी कुड़ी बनना कितना मुश्किल था आपके लिए?
बहुत मुश्किल नहीं था, क्योंकि मेरे बहुत सारे दोस्त और पड़ोसी पंजाबी हैं। तो मैं उनके रहन-सहन ओर आदतों से वाकिफ थी। हां मुझे पंजाबी के एक्सेंट पर थोड़ा काम करना पड़ा।
हां नीतू पंजाबी नहीं बोलती, हिंदी फिल्म है लेकिन पंजाबी लहजा है। मुझे वो लहजा सीखना पड़ा। 'लव शव ते चिकन खुराना' के राइटर हैं सुमित। उन्हीं से ही मैंने ट्रेनिंग ली।
गालियों से मैंने पंजाबी लहजा सीखना शुरू किया तो बहुत जल्दी सीख गई थी।
'घनचक्कर' की नीतू के बारे में कुछ बताइए?
मैं यानी नीतू एक हटटी-कट्टी पंजाबी हाउस वाइफ हूं। नीतू को किसी की कोई परवाह नहीं है अपनी मनमर्जी की करती है। वो अपने आपको मॉडर्न दिखाने के लिए कांटा-चम्मच से रोटी खाती है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके पति उसे क्या बोलते हैं।
आपने फिल्म के लिए वजन भी बढ़ाया हैं?
हां मुझे खाते-पीते घर की पंजाबी कुड़ी लगना था । 'डर्टी पिक्चर' में मैंने जो वजन बढ़ाया था, उसी को मैंने बरकरार रख थोड़ा और वजन बढ़ाया।
आपने 'घनचक्कर' में काफी उटपटांग कपड़े पहने हैं?
हां, फिल्म में मैंने उटपटांग कपड़े पहने है कि क्योंकि नीतू बहुत मॉडर्न बनना चाहती है। वो फैशन करना जानती नहीं है लेकिन दूसरों को देखकर जो मर्जी पहन लेती है।
नीतू के साथ बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई आम महिला अचानक मॉडर्न बनना चाहती है और उटपटांग फैशन को अपनाती है जिसे कोई समझ नहीं है फैशन की। वो सिर्फ दूसरों को फॉलो करती है।
वो फैशन मैगजीन देखती है तो उसे भी फोलो करना चाहती है। पंजाबी जैसे कि बहुत खुशमिजाज होते हैं, नीतू भी वैसी ही है।
अब स्क्रीन पर गालियां देने में कैसा महसूस होता है?
अब तो बहुत मुश्किल नहीं लगता क्योंकि मैं गालियां दे चुकी हूं। 'इश्किया' में जब मैंने नसीर साहब को गाली दे दी, उसके बाद तो मुझमें कॉन्फिडेंस आ गया।
आपको पंजाबी एक्सेंट सीखने में कितना समय लगा?
मुझे बहुत ज्यादा टाइम नहीं लगा क्योंकि सुमित बहुत ही अच्छे ट्रेनर हैं। चूंकि मैं पंजाबी बोलचाल से वाकिफ थी तो मुझे सीखने में थोड़ी आसानी हुई।
पहली बार कॉमेडी रोल करना कितना मुश्किल था?
मेरे लिए कॉमेडी और गंभीर हर तरह के रोल आसान और मुश्किल होते हैं। ये कहना बहुत मुश्किल है कि कॉमेडी ज्यादा मुश्किल है या ड्रामा।
हां, ये मेरी पहली कॉमेडी फिल्म है, मैं ड्रामा पहले कई बार कर चुकी हूं। पर ऐसा नहीं है कि ड्रामा करना आसान होता है।
कोई ऐसा मोमेंट जो फिल्म या प्रमोशन के दौरान आपको हंसाता हो?
प्रमोशन के दौरान बहुत मजा आ रहा है क्योंकि मैं नीतू के कॉस्ट्यूम में ही प्रमोशन कर रही हूं और पंजाबी एक्सेंट में बोलती हूं तो अलग-अलग चीजें करने को मिल रही हैं। किटी पार्टी कर रहे हैं, मस्ती कर रहे हैं।
फिल्म के दौरान भी मजा बहुत आया लेकिन काम की वजह से मस्ती नहीं हुई। हालांकि हंसने-हंसाने वाले बहुत मौके आए क्योंकि कई सिचुएशंस बहुत फनी होती थी।
फिल्म के दौरान कोई ऐसा सीन आया जब आपको लगा हो कि ये आपसे नहीं होगा?
फिल्म के दौरान डर तो था थोड़ा बहुत। लेकिन वो डर भी निकल गया क्योंकि मैं राजकुमार के साथ, इमरान के साथ काम कर रही थी। इन सबके साथ मैं पहले भी काम कर चुकी थी।
पूरानी यूनिट थी, राजेश, इमरान, राजकुमार और यूटीवी सभी के साथ पहले काम किया था तो बहुत ही कंफर्टेबल माहौल था मेरे लिए। इसीलिए बहुत ज्यादा मुश्किल मुझे आई नहीं।
मैं बहुत सिक्योर फील कर रही थी क्योंकि मुझे महसूस हो रहा था कि मैं अपने ही लोगों के साथ काम कर रही हूं।
इमरान हाशमी के साथ फिल्म में आप बहुत कंफर्टेबल दिख रही हैं?
हां, मेरा रिलेशन इमरान के साथ 'डर्टी पिक्चर' में एकदम अलग था। वहां एक-दूसरे से नफरत करते-करते प्यार करते हैं लेकिन प्यार पूरा नहीं हो पाता।
लेकिन यहां प्यार हो गया है और इस बात को पांच साल बीत गए हैं। पांच साल बाद टेकन फॉर ग्रांटेड लेने वाली बात जहां कपल्स के बीच आ जाती है, वैसा ही हमारे साथ भी था। एक-दूसरे की आदतों से आप वाकिफ होते हैं। नोक-झोंक करते हैं एक-दूसरे से।
मुझे एक्साइटेड ये लगा कि एक ही एक्टर के साथ मुझे डिफरेंट रोल करने का मौका मिला। ये बिल्कुल वैसा ही है 'ओल्ड वाइन इन न्यू बोटल'।
'मिसेज पम्मी प्यारेलाल' में आप टिप्स देती नजर आएंगी कि पति को कंट्रोल में कैसे करें, तो क्या आप रीयल लाइफ में भी ऐसे ही टिप्स को अपनाती हैं?
नहीं।
आप कोई टिप्स बताइए जिससे कि पति को कंट्रोल में किया जा सकें?
वैसे तो मैं किसी को फिलहाल कोई टिप्स नहीं देना चाहती क्योंकि मेरी खुद की शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है। शायद एक साल बाद मैं टिप्स दे पाउं।
एक लाइन में बताइए लोग 'घनचक्कर' क्यों देखें?
हंसते-हंसते आप फंसते जाओगे और फंसते-फंसते भी हंसते रहोगे।