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'सत्या' की रिलीज के 15 साल और कुछ दिलचस्प बातें

Sat, 28 Sep 2013 04:41 PM IST
दिनेश श्रीनेत
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गैंगस्टर फिल्में पहले भी बनती थीं, मगर आज से ठीक 15 साल पहले आई 'सत्या' ने सब कुछ बदलकर रख दिया। फिल्म का ट्रीटमेंट भी बहुत अलग किस्म का था। बिल्कुल रियलिस्टिक शैली में बनी फिल्म न तो अपने पात्रों पर कोई टिप्पणी करती थी और न ही परिस्थितियों पर।
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यह शैली मीरा नायर की 'सलाम बांबे' और शेखर कपूर की 'बैंडिट क्वीन' के करीब भले हो मगर मुख्यधारा के सिनेमा के लिए बिल्कुल नई थी। आइए एक नजर डालते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट्स पर।

*बहुत कम संवाद बोलने वाले नायक जेडी चक्रवर्ती और अपनी अनसर्टेनिटी से लोगों को पूरी फिल्म में बांधे रखने वाले मनोज वाजपेयी दर्शकों के लिए बिल्कुल नए थे।
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*फिल्म समीक्षकों ने 'सत्या' को 1990 की सबसे बेहतरीन फिल्म माना और आल टाइम बेस्ट गैंगस्टर फिल्म का खिताब भी दिया गया।

*इस फिल्म के साथ हॉलीवुड ने अपने नॉयर सिनेमा (डार्क शैली में बनी गैंगस्टर फिल्में) के जॅनर में एक नया सबजॅनर जोड़ा- वह था मुंबई नॉयर।

*राम गोपाल वर्मा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि अंग्रेजी लेखक और दार्शनिक कॉलिन विल्सन की किताब 'द क्रिमिनल हिस्ट्री ऑफ मैनकाइंड' का इस फिल्म पर गहरा असर रहा है।

*रामू के मुताबिक 'सत्या' फिल्म का कोई भी चरित्र काल्पनिक नहीं है। हर कैरेक्टर रीयल लाइफ से उठाया गया है कुछ का सीधे अंडरवर्ल्ड से वास्ता रहा तो कुछ उस दुनिया के बाहर के थे मगर रामू से टकराए थे।

*कल्लू मामा का चरित्र एक ऐसे पूर्व गैंगस्टर पर आधारित था, जिससे राम गोपाल वर्मा की मुलाकात हुई। पहली मुलाकात में रामू बहुत असहज रहे मगर बाद में उस शख्स से गहरी दोस्ती हो गई।

*जेडी चक्रवर्ती ने 'सत्या' से पहले रामू की पहली फिल्म शिवा में एक छोटा सा किरदार निभाया था।

*उर्मिला इस फिल्म के लिए रामू की पहली पसंद नहीं थीं। वे महिमा चौधरी को लेना चाहते थे मगर महिमा ने अंडरवर्ल्ड की थीम होने की वजह से काम करने से इनकार कर दिया।

*कल्लू मामा बने सौरभ शुक्ला ने इस फिल्म के डॉयलाग और पटकथा लिखने में विशेष सहयोग किया था। रामू को भरोसा नहीं था कि महज 23 साल के अनुराग कश्यप इस फिल्म के संवाद लिख सकेंगे, उन्होंने संवादों के लिए मशहूर नाटककार विजय तेंडुलकर से भी बात की थी मगर वे अस्वस्थ होने के कारण इस प्रोजेक्ट में शामिल न हो सके।

*फिल्म के गीत "गोली मार भेजे में" और "सपने में मिलती है" बहुत पसंद किए गए। इसका संगीत दिया था विशाल भारद्वाज ने और गीत लिखे थे गुलजार ने।

*इस फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर को तैयार करने का जिम्मा संदीप चौटा को दिया गया था। बाद में इसके बैकग्राउंड स्कोर पर आधारित एक अल्बम भी जारी किया गया- 'सत्याः द साउंड'।
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*'सत्या' को छह फिल्मफेयर अवार्ड मिले थे जिसमें बेस्ट मूवी, बेस्ट एक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट एडिटिंग भी शामिल था।

*ब्रिटिश फिल्म निर्देशक डैली बॉयल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'स्लमडॉग मिलियनेयर' पर 'सत्या' का गहरा असर रहा है।
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