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सास के तानों से आई तंग तो करा दिया 11 साल के देवर का कत्ल

Wed, 10 Jun 2015 04:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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मुरादाबाद में ग्यारह साल के बच्चे समीर की हत्या कर लाश को टुकड़ों में जंगल में फेंकने की सनसनीखेज घटना के मुख्य आरोपी नन्हे को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। समीर की हत्या करने वाला आरोपी नन्हे उसका सौतेला बड़ा भाई है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि इस हत्या की पटकथा उसकी पत्नी महनाज ने लिखी थी। वो सौतेली सास के तानों से तंग आ चुकी थी।

मूंढापांडे थाना क्षेत्र के गांव वीरपुर वरियार उर्फ खरग से 26 मई की शाम को अकबर का बेटा समीर (11) अचानक गायब हो गया था। चार जून को गांव के जंगल में उसकी खोपड़ी पड़ी मिली थी। जिसके पास ही समीर के कपड़े भी पड़े थे।
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सास देती थी सबक सिखाने की धमकी

पुलिस ने पांच जून को इस मामले में गांव के ही फहीम को गिरफ्तार किया था। जिसने खुलासा किया था कि हत्या में समीर का सौतेला बड़ा भाई नन्हे और नन्हे की पत्नी महनाज भी शामिल थे।

मंगलवार को नन्हे पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उसके पिता अकबर ने दूसरी शादी कर ली थी। समीर उसकी सौतेली मां शहाना का बेटा था। नन्हें ने पुलिस को बताया कि सौतेली मां शहाना और उसकी पत्नी महनाज के बीच नहीं बनती थी।

शहाना अक्सर धमकी देती थी कि बेटे समीर को बड़ा होने दो तुम सबको घर से निकलवा दूंगी। बकौल नन्हें सौतेली सास की धमकियों के चलते उसकी पत्नी महनाज भविष्य को लेकर डर गई थी उसी ने कहा कि भविष्य सुरक्षित करना है तो समीर को मार दो। समीर के मरने से दो फायदे थे एक दो शहाना कमजोर होती दूसरा पिता अकबर की संपत्ति दो हिस्सों में नहीं बंटेगी और इकलौता बेटा रह जाने पर पूरी जायदाद नन्हें को मिल जाएगी।
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अपने ही जाल में फंस गए कातिल

पुलिस के मुताबिक 26 मई की शाम को गांव के बाहर पतंग उड़ाने के बाद रोज की तरह समीर आम के बाग से लकड़ियां बीनने जा रहा था। तभी बाइक से नन्हे और फहीम वहां पहुंचे और समीर को बाग तक छोड़ देने की बात कहकर बाइक पर बैठा लिया।

दोनों उसे वीरपुर वरियार से करीब तीन किमी दूर स्थित ईलर माफी गांव के जंगल में ले गए और रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। लाश जंगल में ही छोड़कर दोनों वापस आ गए। लेकिन अकबर ने जब बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई तो पुलिस सक्रिय हो गई।

इसके बाद नन्हे और फहीम लाश को ठिकाने लगाने के लिए दोबारा मौका ए वारदात पर पहुंचे। लेकिन तब तक जंगली जानवर शव को नोच चुके थे। मौके पर केवल कंकाल बचा था।

नन्हे ने बाकी कंकाल तो रझेड़ा नदी में बहा दिया जबकि खोपड़ी और कपड़े लाकर गांव के पास पोपुलर के बाग में डाल दिए। ताकि बाग में लाश मिलने से कोई यह समझ सके कि लकड़ी बीनने आए समीर को जानवरों ने मारकर खा लिया है। लेकिन उसकी यही जाल उसे ले डूबी। नन्हे खोपड़ी और उसके पास कपड़े लाकर नहीं डालता तो शायद ही कभी समीर के कंकाल की शिनाख्त हो पाती।
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