फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संपन्न देशों से ज्यादा खतरनाक हथियार हैं ISIS के पास

Sat, 05 Mar 2016 03:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
उनकी शक्लें और जिस्म इंसानी लगते हैं लेकिन असल में वो जीते-जागते बेकाबू बारूद हैं जो कहीं भी और कभी भी फटकर जान और माल के परखच्चे उड़ा सकते हैं।
विज्ञापन
  उन्हें न सबसे शक्तिशाली अमेरिका की परवाह है, न यूरोप और एशिया से डर। वो धर्म के नाम पर मौत का अवैध कारोबार चलाते हैं लेकिन उन्हें ईश्वर-अल्लाह से खौफ नहीं।   कत्लेआम के दम पर वो दुनियाभर को अपनी विचारधारा और कब्जे में करना चाहते हैं। इसके लिए औरतों और बच्चों यहां तक की जन्म देने वाली अपनी मां तक को मौत की नींद सुलाना पड़े तो वो सरेआम उनका कत्ल करते हैं।
विज्ञापन
  उनकी हैवानियत के निशानों से इराक और सीरिया का चप्पा-चप्पा रंगा है। अब तक कितने लोगों को वो बेरहम मौत दे चुके हैं इसका कोई सटीक आंकड़ा नहीं हैं, लेकिन मरने वालों की तादात कई हजारों में है।   आज आईएसआईएस आतंकी संगठन देशों के लिए ही नहीं पूरी इंसानियत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसकी वजह है आतंकियों के हाथ लगा तबाही मचाने का वो साजो-सामान है, जो पल में मौत का तांडव कर सकता है।   बात तहस-नहस करने वाले उन हथियारों की हो रही है जिसका एक बड़ा जखीरा आईएसआईएस के कब्जे में है और फेहरिस्त को खंगाला जाए तो कई संपन्न देश हथियारों के मामले में आईएसआईएस से पीछे छूट जाएंगे।   कहा जा सकता है कि आज धरती पर आतंकी नहीं, आतंक की जीती—जीगती पूरी फौज है। जो अमन-चैन पसंद मुल्कों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।   आसमान से कहर बरपाने वाले लड़ाकू विमान से लेकर युद्धक टैकों तक, फील्डगन से लेकर मिसाइल लॉन्चर तक, अत्याधुनिक राइफलें और मशीन गन तक ऐसा कुछ भी नहीं बचा है जो आईएसआईएस के पास न हो।   ये हम नहीं कह रहे हैं दरअसल वो आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं जो मिलिटरी फैक्टरी.कॉम और विकिपीडिया से मिले हैं। आगे देखिए आईएसआईएस के हथियारों की पूरी फेहरिस्त।

हवाई ताकत

हथियारों का जखीरा आईएसआईएस ने खुद नहीं बनाया है बल्कि इराकी और सीरियाई सेना से लूटा है। उनके पास मिग-21 और मिग-23 फाइटर जेट हैं।   मिकोयान-गुरेविच मिग-21 और 23 सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है जिसका निर्माण सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो ने किया है।   मिग-21 को "बलालैका" के नाम से भी बुलाया जाता है क्योंकि ये रुसी संगीत वाद्य ऑलोवेक की तरह दिखता है जिसका आकार पेन्सिल की तरह होता है। इन दोनों फाइटर जेट से किसी भी मौसम में हवाई हमलों को अंजाम दिया जा सकता है।   मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आतंकी संगठन अपने लड़ाकों की ट्रेनिंग के लिए मिग-21 और 23 का इस्तेमाल कर रहा है।   आईएसआईएस की हवाई ताकत में अत्याधुनिक सिकोरस्काई यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी शामिल है। ये दो इंजन वाला एक यूटिलिटी हेलीकॉप्टर है।   जीपीएस सिस्टम से लैस हेलीकॉप्टर में एकबार में 11 सैनिक असलहों समेत सवार हो सकते हैं। युद्ध के दौरान इसे माल वाहक की तरह काम में लाया जा सकता है और हमलों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

युद्धक टैंकों की ताकत

धरती पर रेंगती मौत यानी युद्धक टैंकों की बड़ी तादात आतंकी संगठन के पास बताई जाती है। इनमें टी-72, टी-62 और टी-54-55 से लेकर कई श्रेणियों के टैंक शामिल हैं।   अकेले टी-72 की बात करें तो टी-62 का ही अपग्रेडेड वर्जन है। ये उड़ते हुए जेट को अपना निशाना बना सकता है। दिन-रात में किसी भी समय ताबड़-तोड़ हमलों को अंजाम दे सकता है।   इराकी सेना से कब्जाए गए टी-54-55 और टी-62 की बड़ी तादात आईएसआईएस के पास है। ये तमाम रूसी टैंक अपने आप में बेजोड़ हैं जो किसी भी वक्त लड़ाई का पांसा पलटने में सक्षम हैं।   हैरत की बात ये भी है कि इन टैंकों को ऑपरेट करने वाले लड़ाके भी आतंकी संगठन के पास हैं। जो नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने का काम भी करते हैं।   इनके अलावा पैदल सेना के साथ चलने वाले और बहुउद्देशीय टैंक भी संगठन के पास हैं।

फील्ड गन और मशीन गन की ताकत

आतंकी संगठन के पास फील्डगन और मशीन गन भी भारी मात्रा में है। फील्ड गन ऐसी है जिनकी मारक क्षमता टैंकों से कम नहीं हैं। ये एंटी एयरक्राप्ट गन हैं यानी उड़ते हुई लड़ाकू विमानों को निशाना बना सकती हैं।   इनमें रॉक आईलैंड आर्सनल एम198 155एमएम होविट्जर, टाइप59 130Sएमएम फील्डगन, जेडपीयू-1 14.5एमएम एंटीएयरक्राफ्ट गन, जेयू-23-2 और जेडयू-23 एंटीएयरक्राफ्ट गन शामिल हैं।   कई मशीन गन दूसरे विश्व युद्ध की हैं लेकिन मध्य एशिया में अब तक हथियारों के जखीरे का हिस्सा हैं। आईएसआईएस के पास 1938 का रूसी मॉडल की हैवी डीएसएचके हैं जिसे एचएमजी भी कहते हैं।   पीकेएम मशीन गन भी संगठन ने इराकी सेना से लूटी हैं। इसके अलावा हल्की मशीनगन आरपीके एलएमजी भी है। रायफलों की बात करें तो एके-47 लेकर हर श्रेणी की अत्याधुनिक स्निपर राइफलें आतकियों के हाथ में हैं।

मिसाइल करियर और रॉकेट लॉन्चर

भारी भरकम मिसाइलों को ढोने और उन्हें लॉन्च करने वाले मिसाइल करियर भी आतंकी फौज के पास हैं। इनमें एसए-6 गेनफुल शामिल है। इस रूसी मिसाइल लॉन्चर को 2के12कब भी कहते हैं। इसके अलावा एसएस-1 स्कड 9पी117 एसएसएम भी शामिल है।   ये मिसाइल करियर हालांकि काफी पुराने है लेकिन इनसे एक बार में तीन-तीन मिसाइलों को लाने-ले जाने का काम किया जा सकता है। इसके अलावा ये रडार सिस्टम से लैस हैं। जिससे कोसों दूर से दुश्मनों की हलचल का अंजादा लगाया जा सकता हैं। जरूरत पड़ने पर कहीं भी ले जाकर मिसाइलों को लॉन्च किया जा सकता है।   जहां तक रॉकेट लॉन्चरों की बात है आतंकियों के हाथों में जनरल डायनमिक्स और रेयथिओन एफआईएम-92 स्टिंगर एसएएम, आरपीजी-7 एटी, एम79 ओसा वास्प, नोरिंको एचजे-8 जैसे अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चर हैं।   इन्हें कंधों पर लादकर हाथों से चलाया जा सकता है। कह सकते हैं कि ये कंधों से चलाई जाने वाली मिसाइलें हैं जो उड़ते हुए हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमान को गिराने में सक्षम हैं।
विज्ञापन

बख्तरबंद गाड़ियां

असलहा, बारूद और लड़ाकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाली और जरूरत पड़ने पर हमलों को अंजाम देने वाली बख्तरबंद गाड़ियों की भी आतंकी संगठन के पास कमी नहीं हैं।   इनमें एम117 गार्जियन एएसवी, कगर एमआरएपी, एएमजेड डीजिक इनफैंट्री मोबिलिटी व्हीकल, एचएमएमडब्ल्यूवी हम्वी, एम1114 यूएएच अप आरमर्ड हम्वी, टेक्नीकल और ओशकोश मीडियम टैक्टिकल व्हीकल रिप्लेसमेंट शामिल हैं।   इसके अलावा आतंकी संगठन की वर्कशॉप में मौत का एक इंतजाम तैयार हो रहा है। आईएसआईएस रिमोट से चलने वाला आत्मघाती कारें तैयार कर रहा है। बीते दिनों प्रयोगशाला में तैयार की जा रही आत्मघाती कारों का वीडियो आईएस ने एक अंग्रेजी न्यूज चैनल को सौंपा था।   सबसे हैरानी की बात ये है कि आतंकी खुद को ही असलहे-बारूद की तरह इस्तेमाल करते हैं। तमाम आत्मघाती हमले उसकी बानगी हैं।   सोर्स-मिलिट्रीफैक्टरी.कॉम,विकिपीडिया
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें