वक्त के साथ-साथ अब नकल के तरीके भी बदलते जा रहे है। नकल में नई-नई तकनीकों का जमकर प्रयोग किया जाने लगा है। इसी तरह का एक नायाब तरीका यूजीसी नेट परीक्षा के दौरान सामने आया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक विभाग केंद्र पर परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के मोबाइल पर पूरा साल्व पेपर ह्वाट्सऐप पर पहुंच गया। छात्र ने दूसरों को जवाब बताना शुरू किया तो एक छात्रा ने शिकायत की।
शिकायत पर जांच हुई तो केंद्र पर कई अभ्यर्थियों के पास मोबाइल मिले जिनके ह्वाट्सऐप पर साल्व पेपर मिले। एक ही कमरे में एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों के पास से मोबाइल मिले।
छात्र के मोबाइल पर पहुंचा साल्व पेपर
उस कक्ष में मानवशास्त्र विभाग के अभ्यर्थियों की परीक्षा थी, जहां कई छात्र नेता एग्जाम दे रहे थे। विडंबना यह कि इतने के बावजूद विश्वविद्यालय के शिक्षक तथा अफसर इस बात को लेकर आपस में ही उलझ गए कि इसकी रिपोर्ट कौन लिखवाएगा।
यहां तक कि जिस छात्र के मोबाइल पर साल्व पेपर था, उसके खिलाफ भी देर रात तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षकों की इस झड़प का फायदा अभ्यर्थियों ने भी उठाया तथा जमकर प्रतिरोध किया।
इस दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य और पुलिस विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बन यह सब देखते रहे। इसी विभाग के एक अन्य कमरे में भी इसी तरह की शिकायत है लेकिन वहां भी कुछ नहीं हुआ।
छात्रा की शिकायत के बाद मिले मोबाइल और पेपर
मोबाइल तथा अगल-बगल पूछकर नकल की शिकायत शहर के अधिकतर केंद्रों पर रही। इससे अभ्यर्थियों में काफी नाराजगी रही। गौर करने वाली बात यह भी है कि बिना जांच किए चीफ प्रॉक्टर ऑफिस से सभी अभ्यर्थियों को मोबाइल वापस भी कर दिए गए।
दूसरी पारी की परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही विभाग के हाल में परीक्षा दे रही एक छात्रा ने मोबाइल से नकल की शिकायत की। उसने छात्रों की ओर से नकल के लिए दबाव बनाने की भी शिकायत की।
इसके बाद फोर्स के साथ पहुंचे चीफ प्रॉक्टर और शिक्षकों ने जांच की तो अभ्यर्थी के पास न सिर्फ मोबाइल मिला बल्कि, उसमें साल्व पेपर भी थे। जांच के बाद कक्ष में बैठे अधिकतर अभ्यर्थियों के पास मोबाइल मिला।
रिपोर्ट लिखने तक के लिए तैयार नहीं हुए शिक्षक, हुई बहस
इस बाबत उसी कक्ष में बैठे अधीक्षक और कक्ष निरीक्षक से रिपोर्ट लिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने नकल नहीं पकड़ा है इसलिए वह रिपोर्ट नहीं लिखवाएंगे।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों का कहना था कि वे फ्लाइंग स्क्वॉयड की भूमिका में नहीं हैं। उनका काम सिर्फ व्यवस्था और सुरक्षा देखना है। इसलिए वे रिपोर्ट नहीं लिखा सकते। इसको लेकर शिक्षकों के बीच बहस भी हुई।
उसी विभाग में दूसरे कक्ष में डिप्टी रजिस्ट्रार ने भी एक छात्र के पास मोबाइल पकड़ा। उसमें भी प्रश्नपत्र से संबंधित मैटर थे। उस कमरे में भी कई छात्रों के पास मोबाइल होने की शिकायत हुई लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा में नकल रैकेट का भंडाफोड़
वहीं, इलाहाबाद में ही आरआरबी परीक्षा के दौरान नकल कराने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। यह रैकेट भी हाई टेक तरीके से नकल को अंजाम देता था।
रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) इलाहाबाद की ओर से रविवार को हुई असिस्टेंट लोको पॉयलट और टेक्नीशियन के विभिन्न पदों की भर्ती परीक्षा संदेह के घेरे में आ गई। एसटीएफ की सूचना पर करेली एवं धूमनगंज थाना क्षेत्र के दो परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल ब्लूटुथ हेडसेट से नकल करते तीन परीक्षार्थी रंगे हाथ पकड़े गए।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि परीक्षार्थियों को कोई व्यक्ति एक ही नंबर से बारी बारी से सवाल हल करा रहा था। सभी के पास से मोबाइल फोन एवं चिट बरामद हुई। चिट में क्रम नंबर से वैकल्पिक सवालों के जवाब लिखे गए थे।
ब्लूटुथ से नकल करते पकड़े गए अभ्यर्थी
एसटीएफ की इस सूचना से परीक्षा पर सवाल भी खड़े हो गए हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ है, जिसमें रेलवे अफसरों के साथ केंद्र पर तैनात लोगों के मिलीभगत की भी संभावना जताई जा रही है।
एसटीएफ को उस शख्स की भी लोकेशन मिल गई है, जिसने मोबाइल पर छात्रों से एक ही नंबर पर बात की। एसटीएफ की एक टीम उस शख्स को पकड़ने के लिए इलाहाबाद से निकल चुकी है।
आरआरबी परीक्षा के दौरान राजरूपपुर में आर्य बेसिक इंटर कालेज बिहार के बक्सर का मनीष कुमार राय, प्रीतमनगर स्थित राकीराज स्कूल में बिहार के नालंदा का राजनारायण और करेली में सहारा गर्ल्स इंटर कालेज केंद्रों में मिर्जापुर का हरिवंश सिंह पुत्र श्री देवदत्त सिंह पटेल चिट के माध्यम से नकल करते पकड़े गए।
एक ही नंबर से कई लोगों को हल कराए गए सवाल
दरअसल इस परीक्षा पर एसटीएफ की सर्विलांस के जरिये नजर थी। परीक्षा अवधि में मोबाइल से नकल करते तीन छात्र धरे गए। तीनों के कॉल डीटेल से साफ हुआ कि उन्हें फोन एक ही नंबर से आया।
उसी ने तीनों को क्रमवार सवालों के हल बताए। जांच में पता चला कि मोबाइल नंबर परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्र में इस्तेमाल हो रहे हैं। तीनों ही नंबरों पर तकरीबन आधे-आधे घंटे तक बात भी हुई।
एसटीएफ इंस्पेक्टर नवेंदु सिंह ने रेलवे एवं संबंधित सेंटर पर सूचना दी। तत्काल रेलवे का उड़ाका दल मौके पर पहुंचा। तीनों ही केंद्रों पर एक-एक परीक्षार्थी के पास ब्लू टूथ हेड सेट, मोबाइल एवं चिट बरामद हुई।
एसटीएफ की सूचना पर रंगे हाथ धराए तीन परीक्षार्थी
बाद में तीनों परीक्षार्थी करेली और धूमनगंज थाने को सौंप दिए गए। उधर एसटीएफ ने जिस नंबर से तीनों परीक्षार्थी के पास कॉल आई थी, उसे ट्रेस कर फोन करने वाले संबंधित व्यक्ति की लोकेशन ले ली है।
फोन दूसरे जिले से आया था। आशंका है कि नकल कराने वाला बड़ा रैकेट सक्रिय है। आशंका यह भी है कि प्रश्न पत्र केंद्र से लीक हुआ हो। इस बारे में रेलवे के उच्चाधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
उधर, तीनों छात्रों को पकड़ने के बाद एसटीएफ ने एक टीम मोबाइल पर बात करने वाले व्यक्ति को पकड़ने के लिए भेज दी है।
पांच लाख में तय हुआ था सौदा, रख लिए थे मूल दस्तावेज
जिन छात्रों को पकड़ा गया उनसे पूछताछ में सामने आया कि मोबाइल पर बात करने वाले शख्स ने पांच-पांच लाख रुपये का सौदा किया था। उस शख्स ने परीक्षार्थियों के मूल सर्टिफिकेट और मार्कशीट भी अपने पास रखकर पूरी रकम मिलने के बाद लौटाने की बात कही थी।
एसटीएफ का कहना है कि रैकेट में कई और लोग भी शामिल हैं। रेलवे के अफसरों के साथ ही केंद्र पर तैनात लोगों के मिलीभगत की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
आरआरबी इलाहाबाद के चेयरमैन संजीव माथुर का कहना है कि ‘एसटीएफ ने तीन परीक्षार्थियों के नकल करने की सूचना दी थी। परीक्षा केंद्र में पर्ची कैसे पहुंची और वह आरआरबी के क्रमवार प्रश्नों की थी, यह जांच का विषय है।