इंसानों के मारकर खाना भले ही अब बीते जमाने की बात लग रही हो, लेकिन अभी भी देश और दुनिया के सामने ऐसे कुछ मामले आते रहते हैं, जिनको पढने के बाद लगता है कि नरभक्षी इंसान अभी भी हैं।
अभी हाल ही में यूपी के गोरखपुर में एक ऐसे ही नरभक्षी दंपत्ति को पकड़ा गया, जिन्होंने अपने साथ काम करने वाले एक साथी की हत्या कर उसका खून पीया और उसका कलेजा निकालकर आग में भूनकर खाया।
देश का दहला देने वाला सबसे सनसनीखेज निठारी हत्याकांड अब भी आपके दिलो दिमाग में याद होगा। कौन भूल सकता है कि नोएडा के निठारी में इंसान के रूप में मौजूद भेड़ियों ने एक दो नहीं बल्कि 17 बच्चों को अपना शिकार बनाकर इसी कोठी में उन्हें दफन कर दिया था।
पुलिस की नारको टेस्ट में नरपिशाच सुरेंद्र कोली ने स्वीकार किया था कि वह बच्चियों की हत्या के बाद उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देता था। कई बार बच्चे के शरीर के पसंदीदा हिस्से को भूनकर खाता भी था। बचे टुकड़े को दफन कर देता था।
बच्चों से रेप के बाद खाता था उनका मांस
नरपिशाच सुरेंद्र कोली नौकर के रूप में पंढ़ेर की कोठी के गेट पर नजर रखता था। शाम को जब इलाके में सन्नाटा छा जाता था तो वहां से गुजरने वाली लड़कियों को पकड़ लेता और उनका मुंह बांध कर उससे दुष्कर्म करता और फिर उसकी हत्या कर देता। कई बार तो वह शव के साथ भी दुष्कर्म करता था।
इसी तरह की एक और घटना में एक युवक ने अपने साथी के साथ मिलकर अपने ही माता पिता की हत्या कर दी और उनके शव के टुकड़े कर पकाने व भूनने के बाद खाया और जो बच गया उसे लंच बॉक्सों में भर कर फ्रीज में रख दिया।
दरअसल, इंसानी मांस का सेवन दुनिया में सबसे घृणित कार्य है। ऐसी घटनाएं किसी भी सामान्य इंसान का हृदय विचलित कर देती है। लेकिन ऐसी घटनाएं देश-दुनिया में कई बार सामने आती रही हैं।
इसी तरह के एक क्रूर नरभक्षी इंसान अल्बर्ट फिश के बारे में हम आपको बता रहे है, जिसे बच्चों का उत्पीड़न करने में विशेष सुख मिलता था। बच्चों के साथ बलात्कार करना और उनका मांस खाना इसकी आदत में शुमार था।
फिश की नजर उसकी छोटी बहन पर थी
अल्बर्ट फिश 1870 में वाशिंगटन डीसी में पैदा हुआ। उसे ग्रे मैन, वेयरवोल्फ ऑफ वेस्टेरिया और ब्रुकलिन वैम्पायर के नाम से जाना जाता था। उस पर तकरीबन 100 से ज्यादा बच्चों के साथ अत्याचार करने का इल्जाम लगा था। इसके बावजूद उसने सिर्फ तीन कत्ल करने की बात कबूली।
अल्बर्ट के मानसिक बीमारी का एक लंबा इतिहास रहा है, उसके माता पिता ने उसे कम उम्र में ही छोड़ दिया और वह एक अनाथालय में पला-बढ़ा। अल्बर्ट फिश सबसे पहले चर्चा में आया 25 मई 1928 में, जब उसने एक अखबार में नौकरी का विज्ञापन देखा।
अल्बर्ट अंशकालिक काम की तलाश में 18 वर्षीय एडवर्ड बड से मिला तो उसने उसे नौकरी देने का आश्वासन दिया। अल्बर्ट फिश को अपना शिकार मिल गया था। इस बीच फिश की नजर उसकी छोटी बहन ग्रेसी बड पर गई, जो की मात्र 10 वर्ष की थी।
इस बीच अल्बर्ट अपने सौम्य और विनम्र व्यवहार से एडवर्ड बड के परिवार वालों का दिल जीत लिया और उनके साथ दोस्ती भी बना लिया।
पत्र में किया हैवानियत का चित्रण
एक दिन शाम को उसने ग्रेसी को अपनी भतीजी की जन्म दिन पार्टी में ले जाने के लिए उसके मां बाप से अनुमति मांगी। एक उम्रदराज व्यक्ति पर बिना किसी शक के उन्होंने हंसी-ख़ुशी इसकी इजाजत दे दी।
पार्टी के लिए जाने के लिए उत्साहित ग्रेसी ने नए कपड़े पहने और उसके साथ चल दी। उस दिन के बाद से ग्रेसी कभी घर नहीं लौटी। उसे किसी ने जिंदा नहीं देखा। उसके साथ क्या हुआ, यह भी कोई नहीं जान सका।
कुछ दिनों के बाद ग्रेसी के मां बाप को एक गुमनाम सा पत्र मिला जिसे पढ़ने के बाद किसी भी सामानय इंसान की रूह कांप जाए। दरअसल, वह पत्र अल्बर्ट ने ही लिखा था, जिसमे उसने ग्रेसी के साथ किए गए हैवानियत का चित्रण किया था।
उसने लिखा था कि '1894 में मेरा एक मित्र जॉन डेविस एक बार मुझे हांग-कांग लेकर गया। वहां उसने एक नई चीज़ देखी कि वहां हर प्रकार का इंसानी मांस मिल रहा था। यह उसके लिए एक नया नया अनुभव था इस तरह से मानव मांस का खुला बाज़ार देखना।
उसे भी लगा मानव मांस खाने का चस्का
उसके मित्र जॉन डेविस ने बताया कि जब उसने यहां मानव मांस का खुला बाज़ार देखा तो वह भी इस तरीके का अनुभव करना चाहता था। इसके लिए उसने एक प्लान बनाया और न्यूयार्क वापसी में उसने अपने साथ दो लड़कों को ले आया, जिसकी उम्र क्रमशः 7 और 11 साल थी।
इनके मांस का स्वाद चखने के लिए सबसे पहले उसने उनके सारे कपड़े उतार दिए और उन्हें नग्न कर दिया। जैसा की उसने हांग-कांग में देखा था उसी अनुसार वह उन दोनों लड़कों को रोज पीटता और यातनाएं देता था ताकि उनके मांस का स्वाद और बढे। साथ ही इससे उनका मांस नाजुक बना रहता।
अब बारी आई अपने शिकार की तो सबसे पहले उसने 11 साल के लड़के को चुना, क्योंकि उसके हिप्स बहुत बड़े थे, इससे ज्यादा मांस बनता। उसके बाद उसने छोटे लड़के को भी मार कर उसके मांस का भी स्वाद चखा।
जब जॉन डेविस ने मुझे ये घटना सुनाई तो मुझे भी मानव मांस खाने कि तलब लग गई। इसी बीच मैने ग्रेसी को देखा और लगा कि मेरा सपना पूरा होने वाला है। इसके लिए मैने एक बढ़िया सा प्लान बनाया।
प्लान के अनुसार, मैने आप लोगों से झूठ बोला कि मेरी भतीजी की जन्मदिन पार्टी है जिसमें मै ग्रेसी को ले जाना चाहती हूं। उस दिन मैं ग्रेसी को लेकर एक सुनसान घर में गया जहां उसे दुसरे कमरे में बिठा कर मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और नग्न होकर उसे अपने कमरे में बुलाया।
जब उसने मुझे नग्न देखा तो रोते हुए भागने लगी। तब मैंने उसे पकड़ा और उसे भी नग्न कर दिया। काफी देर की कोशिश के बाद वह मेरे काबू में आई तो मैने उसका गला दबा कर मौत की नींद में सुला दिया।
फिर उसके बाद मैने उसके शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े किए और पका कर खाया। मुझे बहुत मजा आया और उसे मैने 9 दिन तक स्वाद लेकर खाया। हालांकि मैने कभी भी उसके साथ सेक्स नहीं किया'।
अब आप से सोच सकते हैं कि ऐसा पत्र पढ़ने के बाद किसी भी मां-बाप का क्या हाल होगा? कांपते मां-बाप वो पत्र लेकर पुलिस के पास गए और फिर पुलिस ने जांच शुरू की। पत्र के आधार पर पुलिस ने अल्बर्ट को गिरफ्तार किया। 16 जनवरी 1936 को अदालत ने अल्बर्ट की हैवानियत के लिए उसे मौत की सजा दी।
अगली बार फिर एक नरपिशाच की कहानी लेकर हम हाजिर होंगे...तब तक के लिए विदा।