जिस मासूम बच्चे की तलाश में माता-पिता की आंखें पथरा गई थीं उस बच्चे का कंकाल बुआ के घर सेफ्टी टैंक से मिलेगा, इसका परिजनों को विश्वास तक नहीं हो रहा है।
उन्हें यह भी विश्वास नहीं हो रहा है कि बच्चे की बुआ ने इस वारदात को अंजाम दिया होगा, लेकिन हालात इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
करीब पांच साल पहले गायब हुए मासूम का कंकाल बुआ के घर सेफ्टी टैंक से बृहस्पतिवार सुबह बरामद हुआ। पांच साल का हिमांशु उर्फ गोलू बुआ के घर से रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था।
माता-पिता ने मंडावली थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराकर हिमांशु की बुआ मुन्नी देवी (50) पर शक जताया था।
पांच साल पहले रहस्यमय ढंग से गायब हुआ था मासूम
वारदात के समय मुन्नी कंकाल मिलने वाले मकान में किराये पर रहती थी। पुलिस ने देर रात मुन्नी को हिरासत में ले लिया है।
वहीं, पुलिस ने डीएनए टेस्ट के लिए कंकाल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, मूलरूप से कफलसार, तहसील थलीसेड़ा, थाना पटवारी, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड निवासी श्रीचंद (40) परिवार के साथ एफ-133, गली नंबर-11, वेस्ट विनोद नगर में रहते हैं।
श्रीचंद करीब 13 साल पहले गांव से दिल्ली आए थे। यहां वे लक्ष्मी नगर में निजी कंपनी में नौकरी करने लगे। घर से चंद कदमों की दूरी पर ए-94, गली नंबर-2 नॉर्थ ब्लॉक वेस्ट विनोद नगर में श्रीचंद की बहन मुन्नी परिवार के साथ रहती थी।
मुन्नी की गली के पास रामलीला होती थी। 26 सितंबर 2009 की रात करीब 10:30 बजे हिमांशु माता-पिता के साथ रामलीला देखने बुआ के घर आया था। श्रीचंद और आशा देवी गली में रामलीला देख रहे थे।
मंडावली थाने में दर्ज था अपहरण का मामला
करीब पंद्रह मिनट बाद अचानक बुआ के घर से हिमांशु गायब हो गया। परिवार ने काफी तलाश किया, लेकिन वह नहीं मिला।
उसी दिन देर रात को मंडावली थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया गया। श्रीचंद ने मुन्नी पर शक जताया।
पुलिस ने उससे पूछताछ करके नारको टेस्ट भी कराया। वर्ष 2013 के अंत में मुन्नी ने बिकने की वजह से ए-94 नंबर का मकान खाली कर दिया।
कुछ दिनों से निर्माण के लिए इस मकान को तोड़ा जा रहा था। बृहस्पतिवार को मकान के ग्राउंड फ्लोर पर टैंक से मलबा निकालने के दौरान बच्चे का कंकाल मिला।
09-09-09 को मनाया था आखिरी जन्मदिन
सफेद रंग के जूतों से उसकी पहचान हिमांशु के रूप में हुई। इधर, कंकाल मिलने का पता चलते ही मुन्नी परिवार सहित घर पर ताला लगाकर फरार हो गई।
पुलिस ने विनोद नगर से ही देर रात उसे पकड़ लिया। श्रीचंद ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बच्चे के साथ तंत्रमंत्र करके हत्या करने की बात कही है।
श्रीचंद ने रोते हुए बताया कि परिवार ने 09-09-09 को हिमांशु का जन्मदिन मनाया था। उस समय यह सोचा भी नहीं था कि उसका आखिरी जन्मदिन होगा।
17 दिन बाद वह गायब हो गया। मुन्नी ने उन्हें कहा कि भीड़ में कोई उसे अगवा करके ले गया। ग्राउंड फ्लोर पर मुन्नी रहती थी। पहली मंजिल पर मकान मालिक रहता था।
लोग पहुंचे मुन्नी के घर तो खिसक गई
छत पर रामलीला देखने के लिए हिमांशु गया था। 15 मिनट के भीतर वह गायब हो गया। परिवार ने उसका पता बताने वाले को 10 हजार रुपये देने के पोस्टर भी छपवाए थे।
वेस्ट विनोद नगर के लोगों को जैसे ही सेफ्टी टैंक से कंकाल मिलने का पता चला तो वहां तांता लग गया। शशि ने बताया कि सुबह के समय कंकाल मिलने पर जूतों से उसकी पहचान हुई।
इसके बाद लोग मुन्नी देवी के घर पहुंच गए। लोगों ने जब उससे कहा कि तुम्हारे पहले वाले घर से बच्चे का कंकाल मिला है तो उसने श्रीचंद को बताने के लिए कहा। लोगों के वहां से हटते ही मुन्नी परिवार के साथ मौके से खिसक गई।
बेटे की आस में परिवार काटता रहा थाने के चक्कर
जिगर के टुकड़े की आस में पांच साल तक परिवार मंडावली थाने से लेकर दिल्ली पुलिस के तमाम अधिकारियों की चौखट पर गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिस बस खानापूर्ति करती रही।
श्रीचंद बार-बार बहन मुन्नी देवी पर बच्चे को गायब करने का आरोप लगाते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
नम आंखों से श्रीचंद ने बताया कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो शायद बच्चे की मौत का भेद पहले ही खुल गया होता। हर सुबह लगता था कि आज उनका बच्चा हिमांशु घर आ जाएगा।
पांच सालों के दौरान उन्होंने किसी बाबा, पीर, फकीर, मौलवी को नहीं छोड़ा जहां जिसने भी बताया परिवार बच्चे की तलाश में वहां गया।
बाबा, पीर, फकीर, मौलवी सबका दरवाजा खटखटाया
श्रीचंद ने आरोप लगाया कि जांच के लिए पुलिस टीम उन्हें जहां भी लेकर गई, खर्चा मांगा गया। पुलिस टीम उनके साथ बागपत, फरीदाबाद, गाजियाबाद समेत अन्य जगहों पर गई।
धीरे-धीरे पुलिस ने मामले में कम रुचि लेना शुरू कर दिया। मुन्नी से सख्ती से पूछताछ भी नहीं की गई। परिवार के दबाव बनाने पर खानापूर्ति के लिए नारको टेस्ट कराया गया।
दिल्ली आने के बाद से मुन्नी उन्हें पसंद नहीं करती थी। बच्चे के गायब होने के बाद उसने श्रीचंद को धमकाते हुए कहा था कि पुलिस को मत बताना कि बच्चा यहां से गायब हुआ है।
शुरुआत में मुन्नी ने श्रीचंद को यह भी कहा था कि बच्चा गाजियाबाद के एक बाबा को ढाई लाख रुपये देने के बाद मिल जाएगा। श्रीचंद के रुपये देने के लिए तैयार होने पर मुन्नी उसे घुमाने लगी। शक जताने पर मुन्नी ने उससे संबंध भी खत्म कर लिया।