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जेल में सेक्स रैकेट, संबंध बनाने को जेलर करता था मजबूर

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बंगलुरू सेंट्रल जेल की शिकायत पेटिका में मिली दो चिट्ठियों ने शासन व प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। दो महिलाओं की ओर से लिखी गई इन चिट्ठियों में यह आरोप लगाया गया है कि सेंट्रल जेल के जेलर ने पुरुष कैदियों से पैसे लेकर महिला कैदियों को उनके साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।
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हाईकोर्ट के नाम पर लिखे गए इन पत्रों को कनार्टक के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ये पत्र करीब 10 महीने पहले लिखे गए थे।

हालांकि जेल के अधिकारियों का कहना है कि दोनों महिलाओं ने उन पर इसलिए गलत आरोप लगाए हैं, क्योंकि उनको अलग-अलग सेल में शिफ्ट कर दिया गया था।

कन्नड़ में लिखे गए इन पत्रों में आरोप लगाया गया है कि पुरुष कैदियों से 300 से 500 रुपए लेकर जेलर ने महिला कैदियों को उनके साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।
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सबसे पहले जज को मिली चिट्ठी

अदालत के आदेश पर जेल में लगाई गई शिकायत पेटिका में ये पत्र सबसे पहले एक जज को मिले थे जिन्हें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया।

यह भी आरोप लगाया गया कि महिला कै‌दियों को इस बात की भी धमकी दी जाती थी कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके रिश्तेदारों को मिलने नहीं दिया जाएगा।

पत्र में एक महिला का नाम भी शामिल है। उस पर आरोप है कि वह अन्य महिला कैदियों के रिश्तेदारों के ओर से लाए जाने वाले खाने को छीन लेती है और उनके साथ मारपीट भी करती है।

हालांकि इस मामले में डीआईजी ने कहा कि उन्हें अब तक कोई भी शिकायत नहीं मिली है। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी सफाई देते हुए कहा कि उन्हें जेल में किसी भी तरह के यौन शोषण से संबंधित शिकायत नहीं मिली है।
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आरोपों पर डीआईजी की सफाई

डीआईजी (कारागार) वीएस राजा ने कहा कि अगर कोई शिकायत मिलती है तो उस पर तत्काल एक्‍शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही मैंने पार्लियामेंट्री कमेटी के साथ जेल का निरीक्षण किया था लेकिन ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई। ये सभी आरोप झूठे हैं।

मामले की जानकारी होने पर कनार्टक सरकार ने महिला और बाल कल्याण विभाग को तत्काल जांच करने के आदेश दिए है। साथ ही बात का भी निर्देश दिया कि मामले की तह तक जाकर पता लगाएं कि क्या सेंट्रल जेल में वाकई महिला कैदियों को सेक्स के लिए मजबूर किया जाता है?

गृहमंत्री केजे जॉर्ज ने बताया कि मामले की जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। अगर इस केस में कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उस पर सरकार तत्काल कार्रवाई करेगी।

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाए हैं कि अगर उन्होंने जेल कर्मचारियों की बात नहीं मानी तो उनकी पेरोल भी ठुकरा दी जाती थी।
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