यूपी के मेरठ में किशोरी को बहला फुसलाकर अपहरण करने वाले आरोपी से ही पुलिस ने किशोरी का सौदा कर डाला। झांसी से दोनों की बरामदगी के बाद भी किशोरी को आरोपी के हवाले कर दिया गया। इतना ही नहीं पुलिस ने दबिश देने के लिए गरीब बाप से 15 हजार रुपये भी लिए। सीबीसीआईडी की विवेचना में इसका खुलासा हुआ है।
जिले के सूरजकुंड रोड निवासी एक व्यक्ति ने 15 जनवरी 2013 को थाना सिविल लाइन में अपनी पुत्री के अपहरण की तहरीर दी थी। युवक का आरोप है कि पड़ोस में ही रहने वाला एक आटो चालक उसकी नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर ले गया।
काफी दिनों तक थाने के चक्कर काटने के बाद तत्कालीन डीआईजी के निर्देश पर एक फरवरी 2013 को आरोपी रूप सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
पुलिस ने मदद के बजाय किया शोषण
किशोरी और आरोपी के झांसी में होने की सूचना पर दरोगा ने किशोरी के पिता और एक सिपाही के साथ दबिश दी। आरोप है कि मिलने के बावजूद किशोरी को आरोपी के ही सुपुर्द कर दिया गया।
सीबीसीआईडी के विवेचक अशोक कुमार ने बुधवार को बताया कि किशोरी का परिवार काफी गरीब है। इसलिए पुलिस ने उसकी कोई मदद नहीं की और उल्टा शोषण किया। बयानों में सामने आया है कि सिविल लाइन पुलिस जब झांसी के थाना मऊ रानीपुर क्षेत्र में किशोरी को बरामद करने गई थी तो थाने से भी दो सिपाही साथ गए थे।
थाने के मुंशी और सिपाहियों का भी कहना है कि किशोरी बरामद हो गई थी, लेकिन उसका दाखिला नहीं किया गया। किशोरी के पिता का आरोप है कि पुलिस ने उसकी बेटी का आरोपी से सौदा कर लिया।
पीड़ित के पिता से पुलिस ने लिए 15000 रुपए
वहीं, दरोगा का कहना है कि किशोरी तो बरामद ही नहीं हुई थी तो आरोप कैसे। पीड़ित के पिता ने बताया कि झांसी में दबिश के नाम पर पुलिस ने उनसे 15 हजार रुपये मांगे थे। उन्होंने कर्ज लेकर पुलिस को 15 हजार रुपये दिए थे।
सीबीसीआईडी के सामने परेशानी
करीब डेढ़ साल बाद भी किशोरी का सुराग नहीं लगा है। आरोपी की मां एक रिटायर सरकारी अफसर के घर बर्तन मांजती थी। इसलिए परिवार वहां मुफ्त में रहता था। आरोपी के नाम और फोटो के अलावा अन्य कोई जानकारी नहीं मिली।
झांसी में तथाकथित रिश्तेदारी होने के चलते ही पुलिस वहां गई थी। हालांकि विवेचक का कहना है कि आरोपी पूर्व में भी एक किशोरी को अपहरण कर मुंबई ले जा चुका है। अंदेशा है कि किशोरी भी कहीं मुंबई में गलत हाथों में न चली गई हो।