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कलयुगी पिता ने कलंकित किया पवित्र रिश्ता

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पैसों की लालच में एक शख्स इस कदर अंधा हो गया कि उसने अपनी दो मासूम बेटियों को बेच डाला। उसने यह शर्मनाक काम एक बार नहीं बल्कि दो बार किया। इसमें एक मैरिज एजेंट ने उसकी मदद की थी।
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घटना अहमदाबाद की है। आरोपी ने 12 और 14 साल की अपनी दो बेटियों को तब बेचा था जब उसकी पत्नी गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती थी। मौका देखकर उसने एक मैरिज एजेंट से संपर्क किया और दोनों को बेच दिया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी की पत्नी शारदा वसावा ने डेट्रोज पुलिस थाने में पति रमेश वसावा के खिलाफ केस दर्ज कराया। उसने शादी के नाम पर छह महीने में दो बार बेटियों को बेचा था।
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दोगुने पैसे में दोबारा बेच दी बेटियां

टीओआई के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की और एजेंट कानूजी ठकोरे समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि आरोपी पिता अभी भी फरार है। दोनों लड़कियों ने पुलिस को बताया कि पिता के चलते उन्हें क्या-क्या झेलना पड़ा।

उन्होंने बताया कि मां के अस्पताल में भर्ती होने के बाद पिता ने उन्हें बड़ी बहन के गांव ले जाकर एक परिवार को बेच दिया। इसकी एवज में उन्होंने दोनों लड़कों से 40-40 हजार रुपए लिए थे। बाद में वे दोनों घर वापस आ गईं।

बीते साल 15 दिसंबर को उन्होंने पहले बड़ी बेटी को 80 हजार में दोबारा बेचा और फिर 25 दिसंबर को छोटी बेटी को उसके जन्मदिन पर 80 हजार में बेच दिया।

पति की इस करतूत के बारे में जब शारदा को पता चला तो उसके होश उड़ गए। उसने पहले एक एनजीओ से संपर्क किया और फिर पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के दबोच लिया।
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यूपी से खरीदी लड़की, कराई बेटे की शादी

टीओआई की ही एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2012 में रचना अवस्थी को 50 हजार में यूपी के मिर्जापुर से खरीदकर कच्छ लाया गया था। नयन बूचिया ने 18 साल की रचना की शादी अपने बेटे हिरेन से कराई थी। वह वहां के माहौल में ढल पाती इससे पहले ही 2013 में उसने एक बेटे को जन्म दिया और इसके एक हफ्ते बाद ही आरोपियों ने उसे 80 हजार में बेच दिया।

पड़ताल में खुलासा हुआ कि पश्चिम बंगाल के अलावा यूपी, असम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से भी लड़कियों की तस्करी की जा रही है।

इस धंधे से जुड़े़ एजेंट लड़कियों की उम्र और रंग के आधार पर 10 हजार से एक लाख के बीच उनका रेट तय करते हैं। एक बार मां बनने के बाद ये लोग लडकियों को ऊंचे पैसे पर किसी और को बेच देते हैं।

2011 के आंकड़ों के अनुसार, कच्छ के ग्रामीण इलाकों में 1000 लड़कों के औसत में कुल 921 लड़कियां ही हैं। जबकि शहरी इलाकों में औसतन 910 लड़कियां ही हैं।
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