एक व्यक्ति ने डेढ़ साल की एक बच्ची के इलाज के लिए अस्पताल में 25 हजार रुपए चुका दिए। बच्ची के मां-बाप के पास उसे देने को उतने रुपए न थे।
इस पर वह कोलकाता के उस दंपति को मजदूरी के लिए अपने गांव ले आया। अगले ही दिन उसने पति को गांव से भगा दिया और उसकी पत्नी को बंधक बनाकर रेप किया।
मदद की गुहार लेकर पति थाने पहुंचा लेकिन वहां भी उसकी किसी ने नहीं सुनी। थाने में अन्य लोगों के काफी कहने के बाद पुलिस आरोपी को पकड़ने गई। कार्रवाई करने के नाम पर पुलिस ने दंपति से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की बात लिखित में लेकर बलात्कार आरोपी को छोड़ दिया।
यह मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का है।
'पत्नी को बहन बताना'
कोलकाता निवासी एक दंपति दिल्ली में रहकर मजदूरी कर रहे थे। उनके डेढ़ साल की एक बच्ची भी है, जो अचानक जल गई थी। उसे दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। ठीक होने पर अस्पताल में दंपति से इलाज में हुए खर्चे के 25 हजार रुपए मांगे गए।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि जब पैसे मिलेंगे तभी इसे छुट्टी दी जाएगी। दंपति अस्पताल के बाहर मायूस होकर बैठ गए, तभी एक अज्ञात व्यक्ति आया और उसने कहा कि वह 25 हजार रुपए देगा, लेकिन बदले में उसके यहां मजदूरी करनी होगी।
इस पर महिला का पति तैयार हो गया। उस व्यक्ति ने कहा कि तुम्हारी पत्नी को भी काम पर रख लेंगे और गांव में तुम अपनी पत्नी को अपनी बहन बताना। उन्होंने मजबूरी में हां कर दी। वे उस व्यक्ति के साथ बड़ौत कोतवाली के एक गांव में एक दिसंबर 2013 को आ गए।
बलात्कार
दो दिसंबर की रात्रि में महिला के पति को उन्होंने वहां से भगा दिया। वह बड़ौत-छपरौली चुंगी पर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी का मोबाइल पर फोन आया कि वे उसके साथ बलात्कार कर रहे हैं। वह कोतवाली पहुंच गया लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी।
'कोई बुरा काम नहीं हुआ'
मंगलवार को कुछ लोगों के प्रयास से उसकी गुहार पुलिस ने सुनी। पुलिस मौके पर पहुंची और उसकी पत्नी व परिवार के लोगों को कोतवाली ले आई।
सीओ घनश्याम सिंह ने बताया कि दंपति ने लिखकर दिया है कि उनके साथ कोई बुरा काम नहीं हुआ है और वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। इसपर उन्होंने दोनों को कोतवाली से अपने घर जाने के लिए छोड़ दिया।