कानूनी व धार्मिक खींचतान के चलते 20 दिन के बच्चे को अपनी मां से अलग अनाथालय में रहना पड़ रहा है। बच्चे की मां अपने माता-पिता के साथ रह रही है जबकि उसका पिता सलाखों के पीछे है।
मामला शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का है, जिसमें बच्चे व उसके पिता की डीएनए जांच होनी है। पीड़िता व उसके बच्चे को अपनाने के लिए आरोपी तैयार है लेकिन महिला के माता-पिता ने दोनों के बीच धर्म की दीवार खड़ी कर दी है।
पीड़िता ने नौ अगस्त को बच्चे को जन्म दिया। जब उससे दुष्कर्म हुआ था तब उसकी आयु 18 साल से कम थी। मामला रोहिणी जिला अदालत में विचाराधीन है और आरोपी की जमानत याचिका जिला अदालत से खारिज हो चुकी है। अब याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
पीड़िता ने पुलिस व डॉक्टरों के कहने पर बच्चे को जन्म दिया, ताकि डीएनए जांच हो सके। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी शादी का झांसा देकर रानी बाग स्थित अपने कार्यालय पर उससे एक साल से शारीरिक संबंध बना रहा था। पीड़िता के गर्भवती होने पर वह उसे छोड़कर अपने घर बिहार भाग गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील विवेक कादियान ने अदालत में कहा कि वह पीड़िता से शादी करने और उसके बच्चे को अपनाने के लिए तैयार है। पीड़िता भी इस बात के लिए तैयार है लेकिन उसके माता पिता को यह रिश्ता मंजूर नहीं है क्योंकि पीड़िता और आरोपी का धर्म अलग है।