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इधर प्रेमिका की डोली उठी, उधर प्रेमी की अर्थी

Wed, 20 Nov 2013 07:42 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोहियानगर एचआईजी फ्लैट्स में किराए पर रहने वाले बीमा एजेंट अनिल कुमार उर्फ विक्की (24) ने सोमवार को आत्महत्या कर ली।
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विक्की का शव कमरे में छत के पंखे से रस्सी से लटका मिला। उसने 8 पेज के दो सुसाइड नोट छोड़े हैं, जिनमें उसने प्रेमिका से शादी न कर पाने को खुदकुशी की वजह लिखा है।

उसकी प्रेमिका की सोमवार को ही शादी तय थी। उसके परिजनों को शादी से इनकार था। बाद में वे राजी हो गए थे, मगर तब तक प्रेमिका की शादी दूसरी जगह तय हो चुकी थी।
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अनिल बनारस के आदमपुर थाना क्षेत्र के गांव कुनिया का रहने वाला था। राजनगर में प्राइवेट कंपनी में दो साल से बीमा एजेंट था।

तीन महीने से वह लोहियानगर के फ्लैट में अपने हेड विनीत मित्तल निवासी मेरठ के साथ रह रहा था। सोमवार दोपहर सबसे पहले उसका शव विनीत ने ही देखा और पुलिस को सूचना दी।

सिहानी गेट पुलिस ने छानबीन की तो दो सुसाइड कमरे से मिले। एक हिंदी में लिखा है और दूसरा अंग्रेजी में। हिंदी वाला अपने माता-पिता को संबोधित है और अंग्रेजी वाला अपने हेड विनीत को।

एसएचओ अशोक सिसौदिया ने बताया कि अनिल के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है।

उसने नई रस्सी से फंदा लगाकर सुसाइड किया है, जिससे साफ है कि उसने अचानक सुसाइड नहीं किया। ऐसा लग रहा है कि उसने रविवार रात यह कदम उठाया होगा। जिस प्रेमिका का जिक्र सुसाइड नोट में है, वह बनारस की ही रहने वाली बताई जा रही है।

सुसाइड नोट में ये लिखा
‘मैं प्रेमिका (नाम लिखा है) से बहुत प्यार करता हूं। उस बिन मां-बाप की बच्ची को मम्मी-पापा का प्यार देने की कोशिश की थी। मेरे घरवालों ने उसे अपनाने से मना कर दिया था, क्योंकि वह हमसे नीची बिरादरी की है।

घरवालों की इजाजत के बिना मैं ये शादी नहीं करना चाहता था। जब परिजन शादी को राजी हुए, तब तक प्रेमिका की शादी दूसरी जगह तय हो चुकी थी। प्रेमिका की 18 नवंबर को शादी होने वाली है। मैं उसके बिना नहीं जी सकता।

मेरे सपनों और उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। मेरे जीने का मकसद खत्म हो चुका है। महीनों से मेरी भूख, प्यास और नींद खत्म हो गई है। मैंने प्रेमिका से मंदिर में साथ निभाने का वादा किया था, जो मैं पूरा नहीं कर पाऊंगा।
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बहुत मजबूर हूं, इसलिए ऐसा करने का फैसला किया है। मम्मी-पापा के लिए कुछ करना चाहता था, मगर नहीं कर सका। इसका अफसोस है। मेरे मरने के बाद प्रेमिका या सर (विनीत) को परेशान न करना, उनका कोई कुसूर नहीं है।

सॉरी मम्मी पापा मैं नालायक हूं। सॉरी सर और सभी दोस्तों। मुझे माफ कर देना। मैं बालक का बालक ही रह गया, बड़ा नहीं हो सका।’
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