रोहतक के गांव गरनावठी में इज्जत के नाम पर एक ही गौत्र के प्रेमी जोड़े की हत्या करने के मामले में पुलिस ने बुधवार देर रात युवती निधि बराक (20) की मां, पिता और चाचा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को इलाका मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत ने मृतका के पिता नरेंद्र उर्फ बिल्लू और चाचा रविंद्र को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जबकि मां रीटा देवी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस हत्या में प्रयुक्त हथियारों और गाड़ी की बरामदगी के लिए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि युवती की मां भी इज्जत के नाम पर दोनों की हत्या करने के पक्ष में थी।
आरोप है कि बुधवार को युवती के परिजनों ने लापता प्रेमी जोड़े को दिल्ली से लाकर उनकी गांव में तेजधार हथियारों से हत्या कर दी थी।
युवक धर्मेंद्र बराक (23) का सिर धड़ से अलग करके उसका शव उनके घर के बाहर ही फेंक दिया था और युवती का शव फूंकने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने अधजला शव चिता से निकाल लिया था।
इस अपराध के बाद वीरवार को भी गांव में तनाव का माहौल रहा, भारी पुलिस बल वहां तैनात किया गया है। वहीं, परिजनों ने वीरवार को तनाव के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
युवक के परिजनों ने तोड़ी चुप्पी, दिए बयान
एसपी राजेश दुग्गल ने बताया कि गांव गरनावठी के निधि और धर्मेंद्र की हत्या के मामले में मृतका के पिता नरेंद्र उर्फ बिल्लू, चाचा रविंद्र, मां रीटा देवी, राजेश, सन्नी और महेश उर्फ छिप्पी के खिलाफ हत्या और शव को खुर्द-बुर्द करने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने पहले काहनौर चौकी प्रभारी के बयान पर मामला दर्ज किया था। अब पुलिस धर्मेंद्र के परिजनों के भी बयान दर्ज कर रही है। पुलिस ने मृतक धर्मेंद्र के पिता प्रकाश और भाई पवन के बयान दर्ज किए हैं, जिसके आधार पर युवती के परिजनों पर आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच के लिए पुलिस उपाधीक्षक अनिल कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया है, जो संबंधित स्थानों पर छापेमारी कर रही है।
कैसा संदेश
हत्यारोपी युवती के पिता नरेंद्र उर्फ बिल्लू को जब अदालत में लाया जा रहा था तो उसके चेहरे पर कोई पछतावा नजर नहीं आया।
बिल्लू ने कहा कि उसे कोई अफसोस नहीं है। समाज में एक मिसाल कायम करने के लिए उसने यह कदम उठाया है और समाज में इसका अलग ही संदेश जाएगा ताकि आगे से बच्चे ऐसा काम न करें, जिससे समाज का ताना-बाना बिगड़ता हो।