पढ़ने और खेलने-कूदने की उम्र में दो लड़के कत्ल के आरोपी बन गए। दिमाग इतना शातिर कि पेशेवेर हत्यारे भी मात खा जाएं। लेकिन कहते हैं कि जुर्म के निशां छिपते नहीं हैं भले कातिल कितना भी शातिर क्यों न हो।
तमिलनाडु में कांचीपुरम के एक अनाथालय में रहने वाले दो लड़कों ने एक 12 साल के बच्चे को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया और फिर केरोसिन तेल डालकर उसे जला डाला। लगभग हर सबूत को मिटाने की कोशिश की।
लेकिन पुलिस पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
पोस्टमार्टम
सत्यज्योति करूणय इलम अनाथालय के वार्डन गुरुवार को जब छत पर गए तो उनको एक जली हुई लाश मिली। वह लाश कक्षा चार में पढ़ने वाले छात्र चिन्ना मुरुगन की थी।
टीओआई के अनुसार, सूचना पर कांचीपुरम पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उन्होंने वार्डन से पूछताछ की तो पता चला कि मुरुगन आखिरी बार अनाथालय में रहने वाले एक कॉलेज छात्र के साथ देखा गया था।
पुलिस ने उस छात्र से पूछताछ की तो उसने वारदात की जानकारी से इनकार कर दिया। उसने बताया कि वारदात वाले दिन वह अपने दोस्त के साथ कंप्यूटर क्लास गया था।
जुर्म कबूला
पुलिस ने उसके दोस्त से भी पूछताछ की। पुलिस को लगा कि दोनों झूठ बोल रहे हैं। गुरुवार को वे दोनों कहीं नहीं गए थे।
पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो वे टूट गए और जुर्म कबूल लिया। जांच अधिकारी ने बताया कि मुरुगन खाना बनाने वाली महिला पार्वती की मदद करता था। वह उसकी समस्याओं को सुनती थी।
गुरुवार को खाना बनने में देर हो गई। आरोपी लड़कों में से एक ने मुरुगन से देरी के बारे में पूछा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर वे दोनों उसे छत पर ले गए। वहां दोनों ने उसे मारकर अधमरा कर दिया और फिर जला दिया।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है और अनाथालय को सील कर दिया है। वहां के 57 बच्चों को सरकारी भवन में भेज दिया गया है।