अल्लाह, मजहब, इबादत के नाम पर अल्लाह की बनाई पाक जमीं को वो हैवान बेगुनाहों के खून से रक्तरंजित करते हैं। वो समस्या का हल नहीं ढूढंते, वो इंसान को ही अल्लाह के घर भेज देते है। उनकी दलीलें चाहे जो भी हों, लेकिन उनकी इबादत और दरिंदगी में फर्क नजर नहीं आता।
मोसुल में एक 15 वर्षीय किशोर को महज इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया, क्योंकि वो गाना सुन रहा था।
नाबालिग का सरेआम सिर कलम कर दिया गया। इसी के साथ दरिंदगी की दास्तान में एक और हैवानी इबारत दर्ज हो गई।
डेलीमेल की खबर के मुताबिक 15 वर्षीय अयहैम हुसैन अपने पिता की दुकान पर पश्चिमी संगीत सुन रहा था तभी आईएसआई के जिहादियों ने उसे पॉप संगीत सुनते हुए देख लिया।
लड़के को स्थानीय शरिया कंगारू कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे मौत की सजा दी सुना दी गई।
इसके बाद आतंकियों ने नाबालिग किशोर का सिर सरेआम धड़ से अलग कर दिया। इस वारदात के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है।
'संगीत से होती है अल्लाह की इबादत में बाधा'
स्थानीय मीडिया सूत्रों के मुताबिक इस तरह की ये पहली घटना है जब आईएसआईएस ने महज संगीत सुनने के लिए किसी को मौत के घाट उतारा हो।
ये भी बताया जा रहा है कि शरिया कोर्ट की तरफ से इस तरह की कोई औपचारिक घोषणा भी नहीं है जो संगीत सुनने पर प्रतिबंध लगाती हो।
आईएसआईएस आतंकी संगठन इराक की स्वात इलाके और सीरिया में पुरजोर तरीके से मध्यकालीन न्याय प्रणाली लागू करने पर अमादा है। जिसमें मामूली बातों के लिए सिर काटकर सजा देना शामिल है। अब तक समलैंगिंग संबंधों आदि के खिलाफ इस तरह की वारदातें सामने आई हैं।
दो साल पहले आंतकी संगठन ने फरमान सुनाया था कि कार, पार्टियों, दुकानों या किसी सार्वजनिक स्थान पर गाना चलाना या खुद गाना बैन है। यही नहीं, दुकानों की खिड़कियों पर लोग अपनी तस्वीरें भी नहीं लगा सकते।
आतंकी फरमान में बताया गया था कि इस्लाम में गाना और संगीत निषेध हैं। गानों और संगीत से अल्लाह और कुरान को याद करने में व्यवधान उत्पन्न होता है। जिससे दिल भ्रष्ट हो जाता है।
करीब हफ्ते भर पर रक्का में भी तीन फुट की तलवार से एक शख्स का सरेआम सिर कलम कर दिया गया था।