दाऊद इब्राहीम पर हाल में गृहमंत्रालय ने बयान दिया था कि दाऊद कहां छुपा है यह सरकार को पता नहीं है। लेकिन गृहमंत्रालय बाद में अपने इस बयान से पलट गया जिससे एक बार फिर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम को उसके अपराधों के लिए सजा दिलाने का मामला जोर पकड़ लिया है।
सरकार के इस विरोधी बयान को लेकर विपक्षी दलों ने संसद में हंगामा किया तो बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी सरकार के इस बयान पर हमला बोला है। शिवसेना ने सामना के जरिए कहा कि एक अमेरिका है कि पाकिस्तान में छुपे आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए पाकिस्तान की बिना अनुमति के ही उसके घर में घुसकर ओसामा को मार गिराते हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा बल सोते रह जाते हैं। लेकिन एक भारत है जिसके पास ऐसा करने के लिए साहस नहीं है।
हालांकि शिवसेना के कटाक्ष के एक दिन बाद शनिवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान देकर दाऊद के पाकिस्तान में मौजूद होने की पुष्टि की। लेकिन दाऊद भारत सरकार के लिए मोस्ट वांटेट कैसे बना और उसके अंडरवर्ल्ड डॉन बनने के पीछे क्या है कहानी?
दाऊद कैसे बना मोस्ट वांटेड?
12 मार्च 1993 को मुंबई में सीरियल बम धमाके हुए जिसके डॉन दाऊद इब्राहीम को दोषी पाया गया। इस आतंकी घटना में 13 बम धमाके हुए थे जिसमें 350 लोगों की मौत हुई थी और 1200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
दाऊद इस घटना के बाद से भारत सरकार के लिए मोस्ट वांटेड अपराधी बन गया। दाऊद पर शिकंजा कसते हुए 2003 में भारत सरकार ने अमेरिका से मिलकर दाऊद को ग्लोबल टेररिस्ट(वैश्विक आतंकवादी) घोषित करा दिया था।
इसके बाद पत्रिका फोर्ब्स की 2011 में जारी दुनिया की मोस्ट वांटेड टॉप-10 अपराधियों की सूची में पहले नंबर था। इसके पहले 2008 में आई फोर्ब्स की दुनिया के मोस्ट वांटेड टॉप-10 अपराधियों की सूची में चौथे स्थान पर था। इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्टों में 2008 में हुए 26/11 हमलों में भी दाऊद का हाथ होना बताया गया था।
एक ईमानदार सिपाही का बेटा है दाऊद
दाऊद इब्राहीम मुंबई पुलिस के एक ईमानदार सिपाही का बेटा है जो शहर के डोंगरी इलाके में पला बढ़ा।
1980 के दशक में दाऊद मुबंई में चल रहे गैंगवार का हिस्सा बना गया और उसके लिए उसने हाजी मस्तान गैंग ज्वाइन कर लिया। लेकिन कुछ दिन बाद ही दाऊद की हाजी मस्तान से बुराई हो गई जिससे दाऊद अपने कुछ साथियों के साथ हाजी मस्तान गैंग से अलग हो गया।
पठान गैंग और हाजी गैंग से टक्कर लेने के बाद दाऊद और शक्तिशाली हो गया और मुंबई में लोग दाऊद से खौफ खाने लगे। पठान गैंग से जुड़े ज्यादातर लोग अफगानिस्तान के प्रवासी थे। पठान गैंग ने दाऊद के भाई का कत्ल कर दिया इसके बाद दाऊद ने शहर पठान गैंग से बदला लेने की ठानी जिसके परिणाम स्वरूप शहर में भयानक खूनी गैंगवार शुरू हुआ।
दाऊद ने हाजी गैंग के सभी सदस्यों को मार दिया जिसके बाद हाजी राजनीति में जुड़ गया और दाऊद अंडरवर्ल्ड अपराधी बन गया।
1980 में बनी दाऊद की डी-कंपनी!
1980 के दशक में दाऊद ने संगठित आपराधिक संस्था बनाई जिसे मीडिया ने डी कंपनी नाम दे दिया। डी-कंपनी दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत बिजनेस संस्था मानी गई है जिसके जरिए जबरन उगाही, सुपारी किलर, हथियार तस्करी, ड्रग तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है।
तमाम आपराधिक गतिविधियों के अलावा क्रिकेट में सट्टेबाजी और मैच फिक्स कराना दाऊद का बड़ा धंधा था। 1985 में दाऊद को दुबई में हुए क्रिकेट मैंचों के दौरान स्टेडियम बैठे देखा गया है।
इसके अलावा दाऊद ने बॉलीवुड में भी में अपना हाथ अजमाया है। रिपोर्ट के अनुसार, दाऊद दूसरे के नाम से फिल्मों में पैसा लगाता था। चोरी-चोरी छुपके-छुपके डी कंपनी के पैसे ही बनी एक फिल्म है।