अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र की छोटी सी दुकान में बैठकर देश के दर्जन भर राज्यों में कई हजार लोगों को ऋण दिलाने के नाम पर करोड़ों की चपत लगाने वाला फाइनेंसर एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
यह साफ है कि वह सासनी गेट के एक फाइनेंस फ्रॉड से जुड़े पुराने मुकदमे का वांछित आरोपी है। फिर भी पुलिस उससे अन्य अपराधों को लेकर जानकारी जुटाने में लगी थी।
इस फाइनेंसर ने सासनी गेट क्षेत्र में एक फाइनेंस कंपनी खोलकर यूपी के अलावा देश के राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, आंध प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, हिमाचल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाया।
इसके मकड़जाल में फंसते लगते लोग
इस फाइनेंस कंपनी के जरिये लोगों को 4 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर ऋण देने का वायदा किया गया और फाइल चार्ज आदि तमाम औपचारिकताओं के नाम पर लोगों को ठग लिया गया। सीधे ऋण के आवेदनकर्ताओं के अलावा वे एजेंट भी इस मकड़जाल में फंसे, जिन्हें आवेदक लाने पर कमीशन का लालच दिया गया।
एक-एक एजेंट ने पांच-पांच सौ लोगों के आवेदन कराए। इस तरह करीब 500 करोड़ अधिक का फ्रॉड इस कंपनी व संचालक के नाम रहा। कई सैकड़ा मुकदमे दर्ज हुए।
महाराष्ट्र में करोड़ों की चपत लोगों को लगी। कई गरीबों द्वारा आत्महत्या की गई तो मसला महाराष्ट्र विधानसभा में उठा। इस ठगी का आंकड़ा सदन में पेश किया गया था।
पुलिस पर बनाया जा रहा है सियासी दवाब
खास बात यह है कि महाराष्ट्र के डीजीपी ने फाइनेंसर की गिरफ्तारी के लिए अलग से एक सेल का गठन किया था। जो उसे आज तक गिरफ्तार नहीं कर सका। हां, जांच में यह जरूर पाया कि इस फाइनेंस कंपनी के संचालक ने अलीगढ़ स्थित एकमात्र बैंक खाते में 21 करोड़ 57 लाख रुपया का महाराष्ट्र से यहां ट्रांसफर किया, जो कुछ दिन बाद निकाला गया।
करीब दो साल पहले न्यायालय में सरेंडर के बाद वह अलीगढ़ जेल में रहा। यहां रहकर तमाम मुकदमे समझौते के आधार पर खत्म कराए। पिछले दिनों व दूसरे राज्य की जेल में शिफ्ट हो गया और पिछले माह ही जेल से छूटा था। मगर पुलिस ने बुधवार दोपहर उसे फिर दबोच लिया।
देर रात उसे सासनी गेट थाने की हिरासत में रखा गया था। जहां जिले से लेकर उच्च स्तर तक की सियासी सिफारिशों का दौर चल रहा था। मगर पुलिस ने उसके खिलाफ सासनी गेट थाने का कई साल पुराना फाइनेंस फ्रॉड का मुकदमा खोज लिया था। इसलिए उसका बृहस्पतिवार को जेल जाना तय है।