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इंटरनेट बैंकिंग में बर्तें सावधानी, एक करोड़ लोगों के डाटा चोरी

Wed, 28 Aug 2013 12:39 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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अगर आप इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करते हैं तो सावधान रहिए। दिल्ली पुलिस ने मेल हैक कर एकाउंट से पैसा उड़ाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो 100 से अधिक लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके हैं।
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साथ ही लगभग एक करोड़ लोगों के बैंक डाटा चुरा लिए हैं। मामले में पुलिस ने दो छात्रों और एक नाइजीरियाई को गिरफ्तार किया है। एक छात्र बीटेक, जबकि दूसरा बीसीए कर रहा है।

पुलिस को इनके कब्जे से करीब एक करोड़ लोगों का डाटा मिला है।

33 बार निकाले पांच-पांच हजार रुपए
दक्षिण जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रमोद कुशवाह ने बताया कि साउथ एक्स निवासी अरुण अग्रवाल के मोबाइल पर 23 जुलाई को आईसीआईसीआई बैंक अकाउंट से पांच हजार रुपए निकलने का मैसेज आया, जबकि उसने पैसे नहीं निकाले थे।
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अगले दिन अरुण के फोन पर फिर मैसेज आया। दो अगस्त को उसके मोबाइल पर फिर मैसेज आया कि उसके ओबीसी बैंक अकाउंट से पांच हजार रुपए निकले हैं। अरुण ने बैंक में पूछताछ की तो पता चला कि ओबीसी बैंक अकाउंट से 33 बार पांच-पांच हजार रुपए निकाले गए।

अरुण की शिकायत पर हौजखास थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। फिर स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर जसमोहिंदर चौधरी की टीम ने तफ्तीश शुरू की। जांच में पता लगा कि अरुण के खातों से रकम नेट बैंकिंग के जरिए निकाली गई है।

100 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी
जसमोहिंदर चौधरी की टीम ने ठगी करने के आरोप में साकेत सिंह और उज्ज्वल आनंद (दोनों 21 वर्ष) को लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद नाइजीरियाई युवक एंथनी चिईनेडू उर्फ टोनी को डाबरी इलाके से दबोच लिया गया।

पुलिस ने इनके कब्जे से 136 सिम कार्ड, पांच डाटा कार्ड, पांच पेन ड्राइव, कंप्यूटर (इसमें एक करोड़ लोगों का डाटा था), तीन लैपटॉप और बैंकों के फर्जी डेविट और क्रेडिट कार्ड बरामद किए हैं। आरोपियों ने सिमकार्ड फर्जी आईडी पर लिए हुए थे। पूछताछ में इन्होंने कबूल किया है कि वे 100 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं।

ऐसे करते थे ठगी
पुलिस अनुसार, आरोपी लोगों के ई-मेल आईडी ले लेते थे। उसके बाद वायरस वाला मेल भेजते थे। जब ग्राहक मेल खोलता और वायरस वाले मेल को डाउनलोड करता तो उसका पैरल फोल्डर हैकर्स के कंप्यूटर में बन जाता था।

जब ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करता तो उसका सारा डाटा इनके फोल्डर में आ जाता था। उसके बाद ग्राहक के अकाउंट में दिए गए मोबाइल नंबर को बंद करवा कर फर्जी आईडी से लिए गए मोबाइल नंबर को उससे जुड़वा देते थे और फिर अकाउंट से राशि निकलवा लेते थे।

चोरों का बैकग्राउंड
बिहार के भागलपुर निवासी साकेत सिंह (21) गाजियाबाद के एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रहा है। उज्ज्वल आनंद (21) गाजियाबाद से बीसीए कर रहा है। टोनी बिजनिस वीजा पर 2010 में भारत आया था।
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