केंद्र सरकार की समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत अब 18 वर्ष तक के बच्चों के उत्पीड़़न पर तत्काल कार्रवाई कराने की अहम जिम्मेदारी गांव स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति को दी गई है।
इसके तहत अगर कोई जीजा कम उम्र की साली के साथ छेड़छाड़ करता है तो पीड़ित की शिकायत पर उसे सजा हो सकती है। अगर वह प्राइवेट पार्ट्स को छूने की हिमाकत करता है तो उसे तीन से 10 साल तक जेल में रहना पड़ सकता है।
गांव या ब्लाक स्तरीय समिति द्वारा प्रकरण को संज्ञान में लाए जाने पर जिला स्तरीय समिति तत्काल केस दर्ज कराकर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कराएगी।
बता दें कि भारत सरकार द्वारा पोषित बाल संरक्षण योजना सूबे में तीन दिसंबर 2010 को लागू हुई और किशोर न्याय ( बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधित अधिनियम 2006 की धारा 62 (क) के प्राविधानों के अनुरूप सूबे में 14 मार्च 2011 को जिला बाल संरक्षण समिति का गठन हुआ।
इसी क्रम में गत 21 मई को प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने ब्लाक और गांव स्तरीय ऐसी समिति का गठन किया। अब जमीनी स्तर पर पूरे सूबे में ऐसी समिति पूरी तरह क्रियान्वित करने की पहल हुई है।
इसके तहत 18 वर्ष तक की आयु वाले बच्चे अगर अपने अभिभावकों से उत्पीड़ित होते हैं और वे इसकी शिकायत जिला स्तरीय समिति में करते हैं तो आरोपी अभिभावक को छह माह तक की जेल की सजा हो सकती है।
योजना में भारतीय समाज में जीजा-साली के रिश्ते की आड़ में बच्चियों का उत्पीड़न के मामले में भी कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके तहत यदि जीजा के व्यवहार पर अवयस्क साली आपत्ति जताए तो गांव स्तरीय समिति प्रकरण को जिला स्तरीय समिति के संज्ञान में लाएगी जिसमें की जिला जज भी नामित सदस्य हैं।
जिला स्तरीय समिति ही ऐसे मामलों में पुलिस में केस बच्ची के उत्पीड़न और पाक्सो के तहत नाबालिग से यौन उत्पीड़न का केस दर्ज करवाकर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कराने की पहल करेगी।
बरेली की जिला प्रोबेशन अधिकारी ऊषा तिवारी के अनुसार, जिले में इसी माह से योजना क्रियान्वित कर दी गई है। ब्लाक और गांव स्तरीय समिति की बैठकें बुलाकर जल्दी उनको जागरूक किया जाएगा।