तमिलनाडु में ग्रेनाइट खनन माफिया पर कारोबार बढ़ाने के लिए नर बलि चढ़ाने का आरोप लगाने वाला आरपीआर ग्रेनाइट्स के मालिक का पूर्व ड्राइवर सामने आ गया है। खनन माफिया पर आरोप लगाने वाला शख्स अब पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए जांच का केंद्र बिंदु बन गया है।
नरबलि चढ़ाने की जांच कर रहे अधिकारियों को माफिया के पूर्व ड्राइवर ने कई जानकारियां दी हैं जिसके जरिए अधिकारी आगे की जांच कर रहे हैं। आरोपी खनन माफिया के पूर्व ड्राइवर एम सेवर्कोडियां ने पुलिस को बताया है कि उसकी जानकारी में अब तक 12 लोगों की बलि दी जा चुकी है जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जिन 12 लोगों की बलि चढ़ा दी जा चुकी है उनमें से चार लोगों के कंकाल बरामद हो चुके हैं। एम सेवर्कोडियां ने पुलिस को खनन माफिया द्वारा नरबलि देने के पीछे की पूरी कहानी बताई है। उसने यह भी बताया कि है कि किस तरह के लोगों की बलि चढ़ाई जाती थी और बलि चढ़ाने से पहले उनके साथ क्या किया जाता था।
क्यों चढ़ाई जाती थी इंसानों की बलि?
मामले में पूछताछ के लिए खनन माफिया पीआर पलननिचामी के निजी सहायक को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सहायक के नेतृत्व में ही नर बलि के काम को अंजाम दिया जाता था।
खनन माफिया के सहायक ने पूछताछ में बताया है कि केरल का एक तांत्रिक पूजापाठ कराने के नाम पर इंसानों की बलि चढ़वाता था। पुलिस अब उस तांत्रिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। उसने बताया कि जिन लोगों की बलि चढ़ाई जाती थी वो मानसिक रूप से अक्षम होते थे और उन्हें सड़कों से उठा लिया जाता था।
वहीं मामले पर शिकायत देने वाले खनन माफिया के पूर्व ड्राइवर ने बताया है कि जब भी कभी कंपनी का विस्तार किया जाता या खनन के आस-पास कोई मंदिर या गांव आ जाता तो उसे हटाने के लिए इंसान की बलि चढ़ाई जाती थी।
अच्छा खाना खिलाने के बाद दी जाती थी बलि
एम सेवर्कोडियां ने दावा किया है वह 1998 से खनन माफिया के यहां नर बलि का चढ़ाने की घटना देख रहा है क्योंकि वह 2003 तक खनन माफिया के यहां नौकरी कर चुका है। उसने बताया कि जिस इंसान की बलि दी जाती उसे पहले अच्छा खाना खिलाया जाता था फिर उसका गला रेत कर बलि दे दी जाती थी। कभी-कभी तो बलि देने बलि देने वाले शख्स को दो-तीन दिन तक एक कमरे में बंद करके रखा जाता था।
गौरतलब है कि सेवर्कोडियां ने खनन माफिया के यहां नौकरी छोड़ने के एक साल बाद ही जिले के एसपी को घटना की जानकारी दी थी लेकिन पुलिस ने तब से कोई कार्रवाई नहीं की थी।
इसके बाद सेवर्कोडियां ने तमिलनाडु के उच्च न्यायालय में शिकायत देकर मामले की जांच कराने की मांग की। इसके बाद तमिलनाडु के उच्च न्यायालय ने आईएएस अफसर यू सहायम के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर जांच का आदेश दिया था। यह टीम अब मामले की जांच में जुटी है।
जब कब्रिस्तान में सोया एक IAS अधिकारी
इससे पहले मामले की जांच का जिम्मा देख रहे आईएएस अफसर यू सहायम की एक तस्वीर भी वायरल हो रही थी जिसमें अफसर को कब्र के ऊपर चारपाई डालकर सोते हुए दिखाया गया था। जांच का जिम्मा देख रहे अफसर इसलिए चारपाई पर कब्र के ऊपर सो रहे थे ताकि कोई नर बलि के सबूतों को गायब न कर सके।
यह तस्वीर तमिलनाडु काडर के आईएएस अफसर यू सहायम की है। मेलुर गांव के कब्रिस्तान में सहायम खाट पर ही सो गए।
वे नहीं चाहते थे कि 1990 में वहां दफनाई गई लाश से कोई किसी तरह की छेड़छाड़ करे। उन्हें किसी ने गोपनीय जानकारी दी थी कि मानसिक रूप से विक्षिप्त एक शख्स को मार कर यहीं दफना दिया गया था।